फील्ड में उतरने से पहले मुख्यमंत्री ने सभी प्रभारी सचिवों को पहले ही अपने प्रभार वाले जिलों में जाकर फीडबैक लेने के आदेश दे दिए हैं। प्रभारी सचिवों के दौरे दिसंबर के पहले हफ्ते तक पूरे होने के आसार हैं। इसके बाद मुख्यमंत्री का दौरा तय हो जाएगा। जन शिकायतों, जनप्रतिनिधियों से जुटाई गई जानकारियों और प्रभारी सचिवों के फीडबैक के आधार पर मुख्यमंत्री समीक्षा करेंगे।
ब्याज मुक्त ऋण का लाभ कितना मिल रहा है
भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री का यह जानने का प्रयास रहेगा कि सरकार किसानों को ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध करा रही है, उसका उन्हें किस हद तक लाभ मिल रहा है। किस स्तर के किसान इस योजना का लाभ उठा रहे हैं।
जो किसान ऋण योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं, उन्हें यह लाभ कैसे दिया जा सकता है, इस बारे में भी फील्ड से ही सुझाव लिए जाएंगे। किसानों की दोगुनी आय और स्वरोजगार को लेकर अलग अलग महकमों के विशेषज्ञों की जो रायशुमारी हो रही है, उसका जमीन पर क्या असर है।
भ्रमण के दौरान विकास कार्यों, आजीविका आधारित योजनाओं और किसानों जुड़ी योजनाओं को लागू करने में जो व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आएंगी, उनका स्पॉट पर ही समाधान किया जाएगा।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, समीक्षा बैठकों के दौरान आला अधिकारियों के साथ ही जिले के विभागीय अधिकारी मौजूद रहेंगे। जिन योजनाओं को प्रभावी ढंग लागू करने में नीतिगत निर्णय लेने होंगे, उनके बारे में शासन स्तर पर शीघ्रता फैसले लिए जाएंगे।
जिलों में जाकर एक-एक विधानसभा की समीक्षा करूंगा। भ्रमण के दौरान प्रवास भी करूंगा। समीक्षा के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की रोजगार और किसानों की दोगुनी आय करने के लिए संचालित की गई योजनाओं की प्रगति जानूंगा। सरकार कृषि क्षेत्र को 80 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है। ब्याजमुक्त ऋण योजना का किसानों को कितना लाभ मिल रहा है। स्वरोजगार और आजीविका बढ़ाने वाली योजना का क्या असर है? योजनाओं को लागू करने में यदि कोई कठिनाई है तो उन सबका समाधान किया जाएगा।
- त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री