उत्तराखंड के प्रमुख मुख्य वन संरक्षक, वन्यजीव विनोद कुमार सिंघल ने बताया कि रेडियो कॉलर छोड़कर मोतीचूर रेंज के अपने बाडे़ से निकलने के बाद बाघिन पार्क के पश्चिमी हिस्से में विचरण कर रही है। बाघिन को पुन: कॉलर आईडी लगाई जाएगी या नहीं के सवाल पर सिंघल ने बताया कि इस विषय में विशेषज्ञों से राय ली जा रही है। ऐसा करने के लिए बाघिन को पुन: ट्रेंक्यूलाइज करना पड़ेगा। यह कितना सही और सुरक्षित रहेगा, इस पर विशेषज्ञों की राय के बाद ही कुछ फैसला लिया जाएगा।
दो अन्य बाघों के पुनर्वास में लग सकता है समय
कॉर्बेट से राजाजी टाइगर रिजर्व में दो और बाघों के प्रस्तावित पुनर्वास में कुछ और समय लग सकता है। एनटीसीए के डीआईजी (वन) सुरेंद्र मेहरा ने एक पत्र के माध्यम से राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण द्वारा उत्तराखंड वन विभाग को यह जानकारी दी है।
मेहरा के मुताबिक कॉर्बेट और राजाजी के पश्चिमी भाग के निवास स्थान 19 किमी रेलवे पटरियों का बड़ा अंतर है। मेहरा के मुताबिक जब तक दोनों स्थानांतरित बाघ अपने बदले हुए परिवेश से पूरी तरह से मुक्त नहीं हो जाते, तब तक इलाके में गहन गश्त और सतर्कता बरतने की जरूरत है। तब तक राजाजी में नए सिरे से कैमरों का जाल, उनके मल और पग के निशान की वैज्ञानिक परीक्षा के माध्यम से उनके स्थान की निरंतर निगरानी रखी जा सकती है।