मल को डीएनए टेस्ट के लिए देहरादून स्थित भारतीय वन्य जीव अनुसंधान संस्थान भेजा जा चुका है। टीमें अभी बेस कैंप नहीं पहुंच सकी हैं। बर्फबारी होने से उच्च हिमालयी क्षेेेत्रों में फंसी हैं, लेकिन सुरक्षित हैं। टीमों में वाइल्ड लाइफ विंग, सिक्योर हिमालय एनजीओ, भारतीय वन्य जीव अनुसंधान संस्थान, भेड़ पालक हैं।
पार्क के उप निदेशक कोमल सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार ने हिम तेंदुओं की ड्रोन कैमरे से गणना कराए जाने की अनुमति दे दी है। जल्द ही ड्रोन से रुपिन, सुपिन और सांकरी रेंज में हिम तेंदुओं की गणना की जाएगी। उप निदेशक के मुताबिक तेंदुओं को ट्रैप करने के लिए हाई क्वालिटी के कैैमरे भी लगाए जाएंगे।
हिम तेंदुओं के फुटप्रिंट और मल मिलने से उनकी मौजूदगी के पुख्ता सबूत मिल चुके हैं। हालांकि, टीमों को तेंदुए नहीं दिखे। पार्क के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में अब ड्रोन कैमरे से उनकी गणना की जाएगी।
- कोमल सिंह, उप निदेशक पार्क