अधिकतम आय की सीमा में संशोधन जरूरी
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक आय प्रमाण पत्र से संबंधित शासनादेश में संशोधन की जरूरत है। मौजूदा शासनादेश वर्ष 2012 का है, जिसमें कमजोर वर्ग के लिए अधिकतम वार्षिक आय 55000 है। इतनी कम आय के प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहे हैं। इस शासनादेश को संशोधित कर वार्षिक आय एक लाख की जानी चाहिए।
यह है शिक्षा का अधिकार
- 6 से 14 साल की उम्र के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार है।
- प्राइवेट स्कूल कम से कम 25 प्रतिशत बच्चों को बिना फीस के एडमिशन देंगे
- कक्षा एक से आठवीं तक है मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था
आरटीई : इतनी सीटों में से इतने बच्चों को मिला एडमिशन
प्रदेश के अल्मोड़ा जिले में आरटीई कोटे की 1597 में से मात्र 924 सीटों पर एडमिशन मिला। जबकि बागेश्वर में 670 में से 248, चमोली में 670 में से 228, चंपावत में 586 में से 457, देहरादून में 5724 में से 5111, हरिद्वार में 7648 में से 2701, नैनीताल में 3186 में से 2253, पौड़ी गढ़वाल में 1794 में से 918, पिथौरागढ़ में 1442 में से 802, रुद्रप्रयाग में 634 में से 112, टिहरी गढ़वाल में 1388 में से 283, ऊधमसिंह नगर में 8225 में से 6170 और उत्तरकाशी जिले में 798 में से 501 सीटों पर गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को एडमिशन मिला।
प्रदेश में आरटीई के तहत सीटें खाली रहने की एक वजह पलायन और आय प्रमाण पत्र सहित जरूरी प्रमाण पत्र न बन पाना है। एडमिशन के लिए निवास का प्रमाण पत्र देना होता है। वहीं अभ्यर्थी जिस क्षेत्र में निवास करता है, उसे उसी क्षेत्र के प्राइवेट स्कूल में प्रवेश की प्राथमिकता दी जाती है।
- डॉ. मुकुल सती, अपर राज्य परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा