ईपीएफओ कार्यालय में इन दिनों काम का बहुत दबाव है। कोरोना की वजह से पूरे स्टाफ को नहीं बुला सकते, लेकिन काम दोगुना हो गया है। अधिकारियों का कहना है कि कोरोना के बाद से अलग-अलग श्रेणियों में दावों की संख्या बढ़ रही है, जिनका निस्तारण करना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
तेजी से बढ़ रहा है नौकरी जाने का आंकड़ा
देहरादून क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत आने वाली कंपनियों में तेजी से नौकरी जाने का आंकड़ा बढ़ रहा है। माना जा रहा है कि जिस जिस हिसाब से पीएफ खातों का सेटलमेंट हो रहा है, वह बेरोजगारी की ओर इशारा कर रहा है।
नौकरी नहीं बची तो अब यही है सहारा
पीएफ कार्यालय में आंसू पोंछती नाजिया अंसारी से जब यहां आने की वजह पूछी गई तो उनका गला भर आया। वे बोलीं- साहब, कंपनी ने पांच महीने से घर बैठाया हुआ है। किराया चढ़ता जा रहा है। पीएफ से पैसा मिल जाएगा तो किराए दे दूंगी।
मुश्किल वक्त है, पीएफ से ही उम्मीदें
अजय थपलियाल ने बताया कि वे एक बड़ी कंपनी में काम करते थे। कोरोना आने के बाद हालात बिगड़ गए तो उनकी नौकरी भी नहीं रही। अब अपना पीएफ खाता बंद करा रहे हैं। इससे जो पैसा मिलेगा, उससे वह कोई और काम शुरू करने की कोशिश करेंगे।
सेलाकुई निवासी नीता भी पीएफ दफ्तर पहुंचीं थीं। उन्होंने बताया कि उनकी मां फैक्ट्री में नौकरी करती थीं। कोरोना संकट शुरू होने के बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। अब खर्चों के लिए पीएफ ही सहारा है। इसलिए वह पीएफ निकासी के लिए यहां आई हैं।
आर्थिक हालात सुधारने में मदद करेगा पीएफ
युवा नीरज कुमार शर्मा भी पीएफ कार्यालय पहुंचे। उनका कहना है कि वैसे तो नौकरी सलामत है, लेकिन कोरोना काल में आर्थिक संकट पैदा हो गया है। लिहाजा, कोविड-19 योजना के तहत वह अपना पैसा निकाल रहे हैं। इससे परिवार की जरूरतें पूरी हो जाएंगी।