जांच में यह बात भी सामने आ रही है कि पूर्व के अध्यक्ष और सचिव ने जिसे मन आया, उसे भर्ती कर दिया। यानी भर्ती के लिए वित्त की स्वीकृति तक नहीं ली गई। लिहाजा, बोर्ड ने ऐसे 38 कर्मचारियों की पहचान कर उन्हें नौकरी से हटा दिया है।
जल्द ही नई इमारत में शिफ्ट होगा कार्यालय
कर्मकार बोर्ड जिस दफ्तर में चल रहा है, उसका किराया भी हर महीने चार लाख रुपये से ऊपर है। इस पर विवाद हुआ तो नए अध्यक्ष शमशेर सिंह सत्याल ने यहां से कार्यालय हटाने की कवायद शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि बोर्ड के दफ्तर के लिए किराये पर कोई सरकारी इमारत तलाश की जा रही है।
कर्मकार बोर्ड का मकसद है कि हर पात्र जरूरतमंद तक मदद पहुंचे। एजी का ऑडिट चल रहा है। इसमें जो भी गड़बड़ियां सामने आएंगी, उस पर रिपोर्ट के बाद कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। जरूरत से ज्यादा कर्मचारियों को नियमों से इतर तैनाती दी गई थी, जिस पर एक्शन लिया जा चुका है। अभी आगे और भी कार्रवाई जारी रहेगी।
-शमशेर सिंह सत्याल, अध्यक्ष, कर्मकार कल्याण बोर्ड