हरिद्वार प्रदेश का पहला ऐसा शहर होगा बनने जा रहा है जहां सड़कों के किनारे बिजली की तारों का झाल नजर नहीं आएगा। शहर में 98 फीसदी क्षेत्र में बिजली की लाइनों को भूमिगत करके आपूर्ति सुचारु कर दी गई है।
31 जनवरी तक पूरे शहर की बिजली की व्यवस्था भूमिगत विद्युत लाइन जुड़ जाएगी। जहां काम पूरा हो चुका है वहां ऊर्जा निगम ने पुराने बिजली खंभों और तारों को हटाने का काम शुरू कर दिया है। दावा किया जा रहा है कि 12 फरवरी तक शहर तारों के जाल से मुक्त हो जाएगा।
301 करोड़ रुपयों की भूमिगत विद्युत लाइन परियोजना का कार्य अब अंतिम चरण में है। योजना के तहत शहर में 33 केवी की 43 किलोमीटर, 11 केवी की 92 किलोमीटर और एलटी की 80 किलोमीटर भूमिगत विद्युत लाइन डाली गई है। अब 33 केवी की विद्युत लाइन की चार्जिंग कार्य 100 फीसदी पूरा हो चुका है।
वहीं 11 केवी विद्युत लाइन की 96 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है। जबकि एलटी की विद्युत लाइन का भी केवल दो फीसदी चार्जिंग कार्य शेष बचा है। इसके साथ कनखल, अपर रोड, हरकी पैड़ी और भूपतवाला क्षेत्र में पुराने पोल से बिजली के तारों का हटाने का काम बड़ी तेजी के साथ चल रहा है। करीब 24 फीसदी कार्य पूरा भी कर लिया गया है।
स्ट्रीट लाइट के पोल नहीं हटेंगे
एलटी लाइन को हटाने के साथ बिजली के खंभों को भी हटाया जाएगा। लेकिन जिन पोल पर स्ट्रीट लाइट लगी है उनको फिलहाल नहीं हटाया जा रहा है।
रोड कटिंग के लिए लेनी होगी विभाग की अनुमति
अब कहीं भी सड़क खोदने से पहले ऊर्जा निगम से भी अनुमति लेनी होगी। अनुमति के बाद विभाग के कर्मचारी की मौजूदगी में ही खुदाई होगी। अनियोजित खोदाई के चलते दुर्घटना की संभावना है। इसलिए खोदाई से पहले सूचना देना अनिवार्य होगा।
शहर में भूमिगत विद्युत लाइन परियोजना का 98 फीसदी चार्जिंग कार्य पूरा हो गया है। विद्युत पोल से तारों को हटाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। 12 फरवरी तक पूरे शहर से तारों का जाल हट जाएगा।
- पवन कुमार, अधिशासी अभियंता, ऊर्जा निगम