फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Exclusive: उत्तराखंड में निराश्रित बेटियों के विवाह का खर्च उठाएगी सरकार, तैयार हो रहा प्रस्ताव

Thu, 29 Dec 2022 06:53 PM IST
अलका त्यागी बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला, देहरादून

सार

समाज कल्याण मंत्री के मुताबिक दूरदराज के गांवों में जाने पर पता चला है कि कई निराश्रित बेटियां हैं। कोविड की वजह से इनकी संख्या में वृद्धि हुई है। कुछ की मां बीमार है तो पिता का निधन हो चुका है।
विज्ञापन
शादी - फोटो : Social Media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उत्तराखंड में कोरोना ने कई बच्चों के सिर से उनके माता-पिता या दोनों में से किसी एक का साया छीन लिया है। कई परिवारों के कमाऊ सदस्यों की मौत हो गई। उत्तराखंड में इससे 6 हजार से ज्यादा बच्चे अनाथ हुए हैं। इसमें लगभग तीन हजार बेटियां शामिल हैं। समाज कल्याण मंत्री चंदनराम दास के मुताबिक सरकार कोविड हो या किसी अन्य वजह से राज्य की निराश्रित बेटियों के विवाह का खर्च उठाएगी। इसके लिए प्रस्ताव तैयार करने के साथ ही प्रदेेशभर में इस तरह की बेटियों का सर्वे कराया जा रहा है। 

विज्ञापन


Uttarakhand: सीएम धामी ने किया राज्यस्तरीय खेल महाकुंभ का शुभारंभ, खिलाड़ियों के लिए की ये घोषणा

समाज कल्याण मंत्री के मुताबिक दूरदराज के गांवों में जाने पर पता चला है कि कई निराश्रित बेटियां हैं। कोविड की वजह से इनकी संख्या में वृद्धि हुई है। कुछ की मां बीमार है तो पिता का निधन हो चुका है। कुछ के माता-पिता दोनों का निधन हो चुका है। विभाग की ओर से विधवा महिला की पुत्री के विवाह के लिए सरकार आर्थिक मदद करती है। इसके बाद सरकार की ओर से अब निराश्रित बेटियों के विवाह का खर्च उठाया जाएगा। मार्च तक इसके सर्वे की रिपोर्ट आने के बाद प्रस्ताव को कैबिनेट में लाया जाएगा। 
विज्ञापन


बढ़कर 6382 हुई कोविड में अनाथ बच्चों की संख्या 
प्रदेश में कोविड में अनाथ हुए बच्चों की संख्या 4308 से बढ़कर 6382 हो गई है। शासन की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान में सरकार की ओर से 4308 बच्चों को योजना का लाभ दिया जा रहा था। नए लाभार्थी के रूप में योजना के तहत 2074 अन्य बच्चों का अनुमोदन किया गया है। 
विज्ञापन


अमर उजाला ने भी खोजे थे कोविड में अनाथ हुए बच्चे 
अमर उजाला ने अपनत्व अभियान चलाकर कोविड में अनाथ हुए बच्चों को खोजा। उसने इन बच्चों के नाम पते और मोबाइल नंबर की सूची विभागीय मंत्री रेखा आर्य को सौंपी। 

मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के तहत लाभार्थियों को तीन हजार रुपये हर महीने डीबीटी के माध्यम से उनके खाते में दिए जा रहे हैं।
- हरिचंद सेमवाल, सचिव बाल विकास विभाग 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें