प्रदेश में उपभोक्ताओं को जल मूल्य में राहत मिल सकती है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में शुक्रवार को इस मामले को लेकर फैसला किया जा सकता है।
अगस्त माह के दौरान ही जल संस्थान ने पानी की घरेलू दरों में 9 से 11 प्रतिशत और व्यवसायिक दरों में 13 से 15 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की थी। यह वृद्धि प्रदेश में अप्रैल माह में लागू भी हो गई थी। कोरोना काल में जल मूल्य बढ़ाए जाने का प्रदेश में विरोध भी हुआ था। इसी को देखते हुए सरकार ने वृद्धि की समीक्षा के लिए समिति का गठन किया था।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में जल मूल्य और सीवर के दरों में संशोधन के लिए गठित समिति की बैठक होगी। सरकार के स्तर पर यह भी माना जा रहा है कि प्रदेश में मीटरिंग और कनेक्शन का बढ़ावा देने की कोशिश को अधिक जल मूल्य धाराशायी कर सकता है। ऐसे में जल मूल्य में कमी की संभावना अधिक बताई जा रही है।
दूसरी और, चुनावी साल होने के कारण भी प्रदेश सरकार पर जल मूल्य को कम करने का दबाव है। वर्तमान में यह वृद्धि अलग-अलग स्लेब मेें करीब 15 प्रतिशत तक है। खुद सरकार मान रही है कि यह स्लेब अधिक है। सूत्रों के मुताबिक सरकार जल मूल्य मेें कमी कर उपभोक्ताओं को रियायत का संकेत देने की कोशिश में भी है। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक और उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत भी इस बैठक में शामिल होंगे।