पशु चिकित्सक ने बताया कि पहले जब किसी वन्यजीव को रेस्क्यू करना होता था तो ट्रैंक्यूलाइज करने के बाद वन्यजीव को बेहोश होने में बीस मिनट तक लग जाते थे। इस दौरान उसके भागने से उसे तलाशना चुनौती भरा होता था, क्योंकि वह झाड़ियों में चला जाता था। इस दौरान उसके हमलावर होने का भी अंदेशा रहता था। अब विदेशी औषधि से महज कुछ मिनट में वन्यजीव बेहोश जाता है और आसानी से पकड़ में आ जाता है।
ये तीन विदेशी औषधियां मिलीं
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व को तीन साल की कड़ी मशक्कत के बाद तीन विदेशी औषधियां मिली हैं। इन औषधियों के साथ उनके एंटीडॉट भी कॉर्बेट को मिले हैं। इन विदेशी दवाओं में एट्रोफाइन का एंटी डोट नेलट्रेक्जोन, मेडीटोमाइडीन का एंटी डोट एटिपएमेजोल और केरविडाइन का एंटी डोट टोलाजोलाइन हैं।
वन्यजीवों को सकुशल रेस्क्यू करने के लिए विदेशी औषधि की जरूरत थी। तीन साल के बाद आखिरकार अब कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के पास विदेशी औषधि है। अब वन्यजीवों को आसानी से रेस्क्यू किया जा सकेगा।
-राहुल, निदेशक कॉर्बेट टाइगर रिजर्व