फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक्सक्लूसिव: कुंभ क्षेत्र में गजराजों को आने से रोकेगी एनाइडर तकनीक 

Sun, 27 Dec 2020 05:15 PM IST
अलका त्यागी सुधाकर भट्ट, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • वन विभाग जुटा तैयारी में, सतत निगरानी को छह टीमें गठित, दो हाथी रेडियो कॉलर किए
विज्ञापन
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कुंभ के दौरान हाथियों को आबादी से दूर रखने के लिए अब वन विभाग एनाइडर (एनिमल डिटेक्शन एंड रिपेलेंट सिस्टम) की मदद लेने की तैयारी भी कर रहा है। वन्यजीव प्रतिपालक के स्तर से यह कोशिश की जा रही है और जल्द ही इसको अमलीजामा पहनाया जा सकता है। 

विज्ञापन


हाथी जैसे विशालकाय वन्यजीव से पार पाना इतना आसान नहीं है और आबादी क्षेत्र में आने वाले हाथियों को वन विभाग कर्मी पंरपरागत तरीके से शोर मचाकर ही दूर भगाते रहे हैं। 

इस बार कुंभ में वन विभाग नई तकनीक का सहारा लेने की कोशिश में भी है। विभाग के मुताबिक हाथियों को दूर भगाने वाले साउंड रिपेलेंट कुछ तकनीक भी विकसित की गई हैं। इसका परीक्षण दो तीन दिन के अंदर करने की तैयारी है। यह योजना कारगर रही तो वन विभाग की एक खास समस्या का कुछ हद तक समाधान हो जाएगा। 
विज्ञापन


सतत निगरानी रखने की भी है तैयारी, छह टीमें गठित
वन विभाग वैसे कुंभ क्षेत्र के आसपास उपस्थिति बनाए रखने वाले हाथियों की सतत निगरानी पर भी काम कर रहा है। इसके तहत दो हाथियों को रेडियो कॉलर लगाया जा चुका है और बाकी के लिए भी तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही वन विभाग के कर्मियों की छह टीम बनाई गई हैं जो लगातार हाथियों के मूवमेंट पर नजर रखे हुए हैं। 

एनाइडर की व्यवस्था के तहत वन्यजीव की उपस्थिति का अनुमान सेंसर से होता है और फिर सेंसर के जरिए तेज आवाज, रोशनी आदि का प्रयोग होता है। वन विभाग के स्तर से कुमाऊं में एक-दो जगह इसका उपयोग भी किया गया और यह पाया गया कि यह तकनीक हाथियों के मामले में कारगर साबित हुई है। 

विज्ञापन

हाथियों के एक समूह पर है खास नजर

कुंभ क्षेत्र के आसपास इस समय कुछ हाथियों का एक समूह है जिस पर वन विभाग नजर जमाए हुए हैं। कुंभ की शुरूआत तक ये हाथी दूर भी जा सकते हैं और नजदीक भी आ सकते हैं। 

ये उपाय भी हैं इस बड़े जीव को दूर रखने के
-लेमन ग्रास की खेती, मधुमक्खी पालन
-हाथीरोधी दीवार, सोलर फेंसिंग, खाई आदि। ये सब काम वन विभाग की ओर से किए जा रहे हैं। 

अभी कुछ और हाथियों को  भी रेडियो कॉलर किया जाना है। इस समय हाथियों की 24 घंटे निगरानी की जा रही है। अब अल्ट्रा साउंड तकनीक के उपयोग से हाथियों की उपस्थिति का पता करने और उन्हें दूर करने पर भी विचार किया जा रहा है। जल्द इसका प्रेजेंटेशन होगा और इस पर फैसला लिया जाएगा। यह तरीका कारगर रहा तो कई समस्याओं का समाधान हो पाएगा।
-जेएस सुहाग, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, उत्तराखंड'
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें