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शराब की दुकानों को लेकर हुआ बड़ा फैसला, जानिए लोगों को क्या होगा फायदा

Wed, 15 Mar 2017 12:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : demo pic
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उत्तराखंड में आबकारी व‌िभाग ने शराब की दुकानों को लेकर बड़ा न‌िर्णय ल‌िया है। इसके बाद अगले वित्त वर्ष के दौरान आबकारी विभाग को करीब 300 करोड़ का झटका लग सकता है।
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शराब की दुकानों को नेशनल और स्टेट हाईवे के 500 मीटर से अधिक दूरी पर शिफ्ट क‌ी जाएंगी। दरअसल, विभाग प्रदेश में गठित होने वाली नई सरकार के समक्ष आबकारी के राजस्व  में करीब 15 प्रतिशत कटौती करने का प्रस्ताव रखने की तैयारी कर रहा है। साथ ही नई आबकारी नीति का खाका भी अब नई सरकार के समक्ष रखा जाएगा। 
 
सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिसंबर के अपने फैसले में आदेश दिया है कि अगले वित्त वर्ष से शराब के उन ठेकों को ही लाइसेंस दिया जाए जो नेशनल और स्टेट हाईवे से 500 मीटर से अधिक की दूरी पर स्थित हों। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश पर अमल करने के लिए विभाग ने संबंधित जिलों के जिलाधिकारी और जिला आबकारी अधिकारियों से कार्ययोजना मंगा ली गई है। प्रदेश के 526 ठेकों में से 402 को शिफ्ट किया जाना है। 
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संबंधित जिलों से इस संबंध में कार्ययोजना विभाग को मिल गई है। शराब के ठेकों को शिफ्ट करने और नई आबकारी नीति का खाका तैयार करने के मुद्दे पर मंगलवार को मुख्य सचिव एस. रामास्वामी ने आबकारी विभाग के अधिकारियों के साथ मीटिंग की। 

जिसमें यह तय हुआ कि नई आबकारी नीति के खाका के साथ-साथ दुकानों को शिफ्ट करने की कार्ययोजना को नई सरकार के समक्ष रखा जाएगा। मीटिंग में अधिकारियों ने यह मुद्दा उठाया कि शराब की दुकानों को शिफ्ट करने की स्थिति में राजस्व के मद में नुकसान उठाना पड़ सकता है, क्योंकि नेशनल और स्टेट हाईवे से 500 मीटर से अधिक की दूरी पर शिफ्ट होने वाले ठेके उतना राजस्व नहीं देंगे, जितना वर्तमान में दे रहे हैं। इस स्थिति में विभाग का राजस्व 15 फीसदी तक कम हो सकता है। 

इस लिहाज से विभाग को 300 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है। चालू वित्त वर्ष के दौरान आबकारी विभाग का लक्ष्य 2100 करोड़ रुपये का है, जिसमें 1800 करोड़ से अधिक का राजस्व विभाग प्राप्त कर चुका है। मीटिंग में मुख्य सचिव को यह जानकारी भी दी गई कि हाईकोर्ट ने चारधाम यात्रा के मद्देनजर तीन जिलों (रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और चमोली) में शराबबंदी का जो आदेश दिया था उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष पुनर्विचार याचिका (एसएलपी) दायर की जा चुकी है। मीटिंग में आबकारी सचिव सीएस नपलच्याल और आबकारी आयुक्त युगल किशोर पंत सहित अन्य कई अधिकारी मौजूद रहे।  
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यहां नहीं बनाई जाएंगी दुकानें

- फोटो : demo pic
हाईवे पर शराब के ठेकों के बोर्ड भी नजर नहीं आने चाहिए
सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिसंबर 2016  को आदेश जारी किया था कि 31 मार्च 2017 के बाद नेशनल और स्टेट हाईवे के 500 मीटर के दायरे में आने वाले शराब ठेकों के लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया जाए। कोर्ट ने यह आदेश भी दिया था कि हाईवे पर शराब के ठेकों के संकेतक या बोर्ड भी नजर नहीं आने चाहिए।

कोर्ट ने अपने इस आदेश में कहा था कि सिर्फ राजस्व प्राप्ति के लिए राजमार्गों के आसपास शराब के ठेके के लाइसेंस देने को जाएजा नहीं ठहराया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आबकारी विभाग ने पुनर्विचार दायर करने की योजना बनाई थी, लेकिन न्याय विभाग ने इसके लिए सहमति नहीं दी थी। इसके बाद प्रदेश में नेशनल और स्टेट हाईवे के 500 मीटर के दायरे में स्थित शराब के ठेकों को शिफ्ट करने की योजना बनाई गई। 
 

तीन जिलों में शराबबंदी के फैसले को दी जा चुकी है चुनौती 
देहरादून। नैनीताल हाईकोर्ट ने चारधाम यात्रा के मद्देनजर प्रदेश के तीन जिलों (रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और चमोली) में 31 मार्च 2017 के बाद पूर्ण शराबबंदी लागू करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सिर्फ राजस्व के लिए लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता है।

हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ आबकारी विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर दी है। विभाग का तर्क है कि इस आदेश पर अमल करने की स्थिति मेें विभाग को राजस्व के मद में लगभग 84.2 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा। 

डूबेगी छह सौ करोड़ की संभावित आमदनी
देहरादून। आबकारी विभाग द्वारा अगले वित्त वर्ष का टारगेट कम किए जाने की स्थिति में लगभग छह सौ करोड़ की संभावित आमदनी भी डूबेगी। सरकार द्वारा हर साल आबकारी के लक्ष्य में 10 से 15 फीसदी की वृद्धि की जाती है। चालू वित्त वर्ष के दौरान आबकारी का लक्ष्य 2100 करोड़ रुपये का है। इस हिसाब से अगले वित्त वर्ष के दौरान यह लक्ष्य लगभग 2400 करोड़ होना चाहिए।

शिफ्टिंग लिहाज में इस में 15 फीसदी की कटौती करने की स्थिति में यह 1800 करोड़ के आसपास बैठेगा। इस स्थिति में विभाग की छह सौ करोड़ रुपये की आमदनी प्रभावित हो सकती है।
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