उत्तराखंड में आबकारी विभाग ने शराब की दुकानों को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। इसके बाद अगले वित्त वर्ष के दौरान आबकारी विभाग को करीब 300 करोड़ का झटका लग सकता है।
शराब की दुकानों को नेशनल और स्टेट हाईवे के 500 मीटर से अधिक दूरी पर शिफ्ट की जाएंगी। दरअसल, विभाग प्रदेश में गठित होने वाली नई सरकार के समक्ष आबकारी के राजस्व में करीब 15 प्रतिशत कटौती करने का प्रस्ताव रखने की तैयारी कर रहा है। साथ ही नई आबकारी नीति का खाका भी अब नई सरकार के समक्ष रखा जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिसंबर के अपने फैसले में आदेश दिया है कि अगले वित्त वर्ष से शराब के उन ठेकों को ही लाइसेंस दिया जाए जो नेशनल और स्टेट हाईवे से 500 मीटर से अधिक की दूरी पर स्थित हों। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश पर अमल करने के लिए विभाग ने संबंधित जिलों के जिलाधिकारी और जिला आबकारी अधिकारियों से कार्ययोजना मंगा ली गई है। प्रदेश के 526 ठेकों में से 402 को शिफ्ट किया जाना है।
संबंधित जिलों से इस संबंध में कार्ययोजना विभाग को मिल गई है। शराब के ठेकों को शिफ्ट करने और नई आबकारी नीति का खाका तैयार करने के मुद्दे पर मंगलवार को मुख्य सचिव एस. रामास्वामी ने आबकारी विभाग के अधिकारियों के साथ मीटिंग की।
जिसमें यह तय हुआ कि नई आबकारी नीति के खाका के साथ-साथ दुकानों को शिफ्ट करने की कार्ययोजना को नई सरकार के समक्ष रखा जाएगा। मीटिंग में अधिकारियों ने यह मुद्दा उठाया कि शराब की दुकानों को शिफ्ट करने की स्थिति में राजस्व के मद में नुकसान उठाना पड़ सकता है, क्योंकि नेशनल और स्टेट हाईवे से 500 मीटर से अधिक की दूरी पर शिफ्ट होने वाले ठेके उतना राजस्व नहीं देंगे, जितना वर्तमान में दे रहे हैं। इस स्थिति में विभाग का राजस्व 15 फीसदी तक कम हो सकता है।
इस लिहाज से विभाग को 300 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है। चालू वित्त वर्ष के दौरान आबकारी विभाग का लक्ष्य 2100 करोड़ रुपये का है, जिसमें 1800 करोड़ से अधिक का राजस्व विभाग प्राप्त कर चुका है। मीटिंग में मुख्य सचिव को यह जानकारी भी दी गई कि हाईकोर्ट ने चारधाम यात्रा के मद्देनजर तीन जिलों (रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और चमोली) में शराबबंदी का जो आदेश दिया था उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष पुनर्विचार याचिका (एसएलपी) दायर की जा चुकी है। मीटिंग में आबकारी सचिव सीएस नपलच्याल और आबकारी आयुक्त युगल किशोर पंत सहित अन्य कई अधिकारी मौजूद रहे।