कौशल्या क्षेत्र के कंडोल, गैर, नवन, श्रीखोन, स्यालंगी, घुड़दौड़ी, खडेत, पंचूर, पाबौ, फलस्वाड़ी आदि गांवों में हल जोत रही हैं। कौशल्या बताती हैं कि शुरुआत में वह सामाजिक रूप से काफी असहज महसूस करती थीं, लेकिन अब सभी लोगों ने उसकी मेहनत को स्वीकार लिया है। बच्चों को पढ़ाकर कौशल्या काबिल बना रही हैं। उनकी तीन बेटियां और एक बेटा है। बड़ी बेटी इंटर पास कर चुकी है। दूसरी बेटी 12वीं, तीसरी 10वीं और बेटा 7वीं कक्षा में पढ़ रहा है।