उपनल में आउटसोर्सिंग की भर्ती पर राज्य आंदोलनकारियों को 10 फीसद क्षैतिज आरक्षण पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों का नौकरियों में कोटा और कम कर देगा।
37 फीसदी पद आरक्षित श्रेणी
पूर्वसैनिक पहले ही उपनल में गैर सैन्य पृष्ठभूमि के लोगों की भर्ती से खासे नाराज हैं ऐसे में निगम पर क्षैतिज आरक्षण प्रभावी करना सरकार को मंहगा पड़ेगा। इससे पहले वर्ष 2012 में कांग्रेस सरकार ने निगम की भर्तियों पर आरक्षण नियमावली प्रभावी कर 37 फीसदी पद आरक्षित श्रेणी से भरे जा रहे हैं।
कांग्रेस सरकार के तीन बरस के कार्यकाल में निगम में पूर्वसैनिकों के लिए रोजगार में पचास फीसदी से अधिक की कटौती तीन वर्ष में हो चुकी है। आउटसोर्सिंग में होने वाली भर्ती के लिए मंत्रिमंडल ने राज्य आंदोलनकारियों के लिए 10 फीसद क्षैतिज आरक्षण देने का फैसला लिया है।
वर्ष 2004 में गठित निगम पूरी तरह से पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए गठित किया गया था, जिसकी भूमिका में सरकार लगातार बदलाव कर रही है। वर्ष 2012 में कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही इसकी भूमिका पूरी तरह से बदल दी।
25 मई 2012 को आउटसोर्सिंग भर्ती पर आरक्षण नियमावली लागू कर दी, जिसमें अनुसूचित जाति के लिए 19 फीसद, जनजाति के लिए 4 फीसद और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 14 फीसद लागू हो गया। इससे पूर्वसैनिकों का हिस्सा भर्तियों में घट गया।
वर्ष 2013 में पूर्व सैनिकों के अलावा गैर सैन्य पृष्ठभूमि को उपनल से भर्तियां देने का शासनादेश मुख्य सचिव ने जारी किया। इसमें एसएसबी गुरिल्लाओं को वरियता देने का जिक्र भी किया गया। वर्ष 2014 में अर्द्धसैनिक बलों के लिए उपनल से भर्तियों के रास्ते खोल दिए गए।
अब राज्य आंदोलनकारियों का 10 फीसद क्षैतिज आरक्षण फौजियों का हिस्सा और कम कर देगा। उपनल के माध्यम से भर्ती हुए 19 हजार कर्मचारियों से 65 फीसदी पूर्व सैनिक और उनके आश्रित हैं, लेकिन यह संख्या अब लगातार गिर रही है।
आउटसोर्सिंग में आरक्षण से फौजी बाहर
अन्य राज्यों में केवल संविदा के पदों के लिए आरक्षण नियमावली प्रभावी है जबकि आउटसोर्सिंग पर भर्ती को आरक्षण के दायरे में नहीं रखा है। आउटसोर्सिंग की सेवाएं विनियमितीकरण की श्रेणी में नहीं आती, जिससे उसपर तैनात मुख्य नियोक्ता की जरूरतों के अनुरूप होती है।
सैनिकों की रिटायरमेंट की उम्र अन्य सभी नौकरियों के मुकाबले कम है, जिससे 10 लाख पूर्व सैनिक और उनके आश्रितों के लिए निगम बनाया गया था। ऐसे में सरकार 10 फीसद आबादी के अधिकारों में कटौती कर रही है।