उन्होंने एक जोड़ी बैल भी खरीदा, लेकिन खेत आबाद किए तो जंगली जानवर मुसीबत बन गए। फसलों को बचाने के लिए उन्होंने जिले के आला अफसरों के साथ कृषि विभाग के चक्कर काटने शुरू कर दिए। नतीजतन कृषि विभाग ने आबाद की गई जमीन पर तारबाड़ करा दी। उद्यान विभाग की मदद से रावत ने करीब 20 बीघा जमीन पर आलू, मटर और मसूर की खेती की है। पांच नाली भूमि पर आम और लीची के पेड़ लगाए हैं।
रावत बताते हैं कि वर्ष 2017 में जब उन्होंने गांव में बंजर खेतों को खोदना शुरू किया तो लोग मजाक उड़ाते थे। काफी समय तक लोग उनकी हंसी उड़ता थे। अब जब मेहनत रंग लाने लगी है तो वही लोग तारीफ करते हैं। उनका कहना है कि वर्षों पहले गांव छोड़ चुके लोग मेरे खेतों को देखने आते हैं। निलाड़ा गांव में दो दशक पहले तक 30 परिवार थे। अब केवल चार परिवार हैं और उनमें भी ज्यादातर बुजुर्ग ही हैं। उनका कहना है कि अभी सिंचाई के लिए पानी नहीं है। इसलिए सीजनल सब्जी ही उगा रहे हैं।
वीरेंद्र सिंह रावत को उद्यान विभाग की ओर से 50 प्रतिशत छूट पर सब्जियों के बीज उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा उन्होंने आम और लीची का बागीचा भी तैयार किया है। वे विपरीत परिस्थितियों में गांव में सब्जी उत्पादन के लिए लोगों के लिए मिसाल की तरह हैं।
-पीडी ढौंडियाल, अपर जिला उद्यान अधिकारी पौड़ी