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पूर्व सैनिक की पहल से बंजर जमीन भी उगलने लगी ‘सोना’, पहले लोग उड़ाते थे मजाक

Sun, 01 Mar 2020 02:18 PM IST
अलका त्यागी नरेश थपलियाल, अमर उजाला, कोटद्वार

सार

  • सेवानिवृत्ति के बाद गांव लौटे पूर्व सैनिक ने वर्षों से बंजर पड़ी जमीन को किया आबाद
  • 20 बीघा जमीन पर लहलहा रही आलू, मटर और मसूर की फसल, बगीचा भी लगाया
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बंजर जमीन पर खेती - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कौन कहता है कि आसमान में सुराख नहीं हो सकता है, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों... इस कहावत को अपनी हाड़ तोड़ मेहनत से सच कर दिखाया है एक पूर्व सैनिक ने। बंजर पड़ चुके जिन खेतों में ऊंची-ऊंची झाड़ियां उग आई थीं और वे जंगली जानवरों का ठिकाना बन चुके थे, आज वो फसल रूपी सोना उगल रहे हैं। उनकी पहल के बाद अब इन खेतों में दोबारा फसलें लहलहाने लगी हैं।

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असंभव दिखने वाले इस काम को संभव किया है उत्तराखंड के पौड़ी जिले के कल्जीखाल विकासखंड स्थित निलाड़ा गांव के सेना से सेवानिवृत्त बिरेंद्र सिंह रावत ने। रावत सेना के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मेकेनिकल इंजीनियर्स (ईएमई) में 22 साल नौकरी करने के बाद 31 जुलाई 2017 को हवलदार पद से सेवानिवृत्त हुए। इससे पहले ही उन्होंने भी और ग्रामीणों की तरह गांव छोड़ दिया था और परिवार देहरादून के नवादा में बस गया। सेवानिवृत्त होने के बाद बिरेंद्र सिंह रावत को कई जगह से नौकरी का ऑफर मिला पर उन्होंने स्वीकार नहीं किया।

वह शहर के जीवन से परेशान हो गए थे और गांव लौटकर माटी का कर्ज अदा करना चाहते थे। गांव आकर उन्होंने बंजर जमीन को आबाद करने की ठानी और अपने खेतों के साथ गांव छोड़ चुके अन्य लोगों की जमीन पर उगी झाड़ियों को काटना शुरू किया।

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पहले लोग उड़ाते थे मजाक

उन्होंने एक जोड़ी बैल भी खरीदा, लेकिन खेत आबाद किए तो जंगली जानवर मुसीबत बन गए। फसलों को बचाने के लिए उन्होंने जिले के आला अफसरों के साथ कृषि विभाग के चक्कर काटने शुरू कर दिए। नतीजतन कृषि विभाग ने आबाद की गई जमीन पर तारबाड़ करा दी। उद्यान विभाग की मदद से रावत ने करीब 20 बीघा जमीन पर आलू, मटर और मसूर की खेती की है। पांच नाली भूमि पर आम और लीची के पेड़ लगाए हैं।

रावत बताते हैं कि वर्ष 2017 में जब उन्होंने गांव में बंजर खेतों को खोदना शुरू किया तो लोग मजाक उड़ाते थे। काफी समय तक लोग उनकी हंसी उड़ता थे। अब जब मेहनत रंग लाने लगी है तो वही लोग तारीफ करते हैं। उनका कहना है कि वर्षों पहले गांव छोड़ चुके लोग मेरे खेतों को देखने आते हैं। निलाड़ा गांव में दो दशक पहले तक 30 परिवार थे। अब केवल चार परिवार हैं और उनमें भी ज्यादातर बुजुर्ग ही हैं। उनका कहना है कि अभी सिंचाई के लिए पानी नहीं है। इसलिए सीजनल सब्जी ही उगा रहे हैं।

वीरेंद्र सिंह रावत को उद्यान विभाग की ओर से 50 प्रतिशत छूट पर सब्जियों के बीज उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा उन्होंने आम और लीची का बागीचा भी तैयार किया है। वे विपरीत परिस्थितियों में गांव में सब्जी उत्पादन के लिए लोगों के लिए मिसाल की तरह हैं।
-पीडी ढौंडियाल, अपर जिला उद्यान अधिकारी पौड़ी
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