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OROP पर जारी रहेगा पूर्वसैनिकों का आंदोलन

Tue, 08 Sep 2015 12:36 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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केंद्र के घोषित वन रैंक वन पेंशन से असंतुष्ट उत्तराखंड के पूर्वसैनिक संगठन अपना आंदोलन जारी रखेंगे।
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पूर्वसैनिक संगठनों के यूनाइटेड फ्रंट ऑफ एक्ससर्विसमेन की सोमवार को हुई बैठक में घोषित ओआरओपी का स्वागत किया लेकिन उसमें कई बिंदुओं पर पेंच फंसाने से नाराजगी जताई है।

फ्रंट ने फैसला लिया कि 12 सितंबर को दून से पूर्वसैनिक मेजर जनरल एचएस चौधरी के नेतृत्व में दिल्ली महारैली का हिस्सा बनने जाएंगे। उसी दिन शाम को पांच बजे गांधी पार्क शहीद स्थल देहरादून में कैंडल मार्च कर आंदोलन जारी रखने का संकेत देंगे।
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फ्रंट की बैठक मेजर जनरल सी नंदवानी (रि) की अध्यक्षता में हुई। उत्तराखंड एक्ससर्विसेज लीज के अध्यक्ष बिग्रेडियर आरएस रावत ने बताया कि पूर्वसैनिकों की समीक्षा हर दो वर्ष में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सांसद भगत सिंह कोश्यारी ने वर्ष 2011 वन रैंक वन पेंशन लागू करने की जो रिपोर्ट दी थी उसी के अनुरूप केंद्र को ओआरओपी लागू करना चाहिए।

पेंशन को अधिकतम स्कैल पर लाया जाना चाहिए न कि जिनकी पेंशन कम है उसमें औसत बढ़ोतरी करनी चाहिए। प्री मेच्योरर्ड रिटायरमेंट पर आने वाला सैनिक अपनी सेवा का अधिकतम समय सेवा करके आता है उसकी पेंशन को भी ओआरओपी के अंदर लाना चाहिए।

बैठक में मेजर जनरल लालजी डी सिंह (रि), ब्रिगेडियर सीबी थापा (रि), ब्रिगेडियर विजय कुमार (रि), कर्नल जीएस चीमा (रि), कर्नल पीएल पराशर (रि), आनरेरी कैप्टन बीएस नेगी(रि), कैप्टन अशोक लिंबू (रि), कैप्टन एएस भंडारी, कर्नल डीबी थापा (रि) आदि मौजूद रहे।

तीन सेना अध्यक्षों पर खड़ा किया सवाल
पूर्व सैनिकों ने अपने तीनों सेनाध्यक्षों पर सवाल खड़ा किया है। वीआरएस का मुद्दा वन रैंक वन पेंशन में कहां से शामिल किया गया इसके लिए तीनों सेना प्रमुख जिम्मेदार है।
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रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने ओआरओपी घोषित करने से पूर्व इन तीनों सैन्य अधिकारियों के साथ वार्ता की लेकिन उन्होंने कोई आपत्ति नहीं जताई। फ्रंट के पूर्व सैन्य जनरलों का कहना है कि यह सेना प्रमुखों का दायित्व था कि वीआरएस पर रक्षा मंत्री को स्थिति साफ करते कि सेना में सेवानिवृति की प्रक्रिया सिविल से भिन्न है।
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