प्रदेश सरकार से खफा पूर्व सैनिकों ने सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाया है। पूर्व सैनिक वेलफेयर एसोसिएशन ने कहा कि चुनाव नजदीक देखकर सरकार को पूर्व सैनिकों की याद आई है। चार साल तक पूर्व सैनिकों की सुधि नहीं ली। एसोसिएशन के अध्यक्ष शमशेर सिंह बिष्ट ने कहा कि स्थापना दिवस 24 जनवरी को भारी संख्या में पूर्व सैनिकों के एकत्र होने से सरकार सकते में आ गई है।
सरकार से खफा पूर्व सैनिक
बिष्ट ने आरोप लगाया कि प्रदेश में अधिकारियों से नीचेके सैनिकों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। पूर्व सैन्य अधिकारियों ने हितों को साधने के लिए केंद्र सैनिक निदेशालय की नियमावली में फेरबदल किया है। अब बिग्रेडियर के स्थान पर कर्नल तक को निदेशक बनाया जा सकता है।
इसके विपरीत सैनिक कल्याण में सहायक अधिकारी ऑनरेरी/कैप्टन को कागजातों में हस्ताक्षर करने पर रोक लगा दी है, जबकि पहले साल 1972 तक सोल्जर बोर्ड का सैनिक कल्याण अधिकारी ऑनरेरी लेफ्टिनेंट स्व. बीबी रावत रहे। जब कर्नल निदेशक बन सकता है तो ऑनरेरी कैप्टन/ले. जिसे महामहिम राष्ट्रपति द्वारा सैन्य अधिकारी घोषित किया गया है, उसको भी सैनिक कल्याण अधिकारी बनाया जाना चाहिए।
भेदभाव का लगाया आरोप
बिष्ट ने कहा कि उपनल की स्थापना पूर्व सैनिकों को रोजगार से जोड़ने के लिए की गई थी, लेकिन वहां भी पूर्व सैनिकों के साथ भेद-भाव किया जा रहा है। उपनल में पूर्व सैनिकों को माली से भी नीचे का दर्जा दिया जा रहा है। जब मर्जी उनको नौकरी से हटा दिया जाता है।
शमशेर सिंह बिष्ट ने कहा अगर मुख्यमंत्री वास्तव में पूर्व सैनिकों के हितों के लिए गंभीर हैं तो सैनिक कल्याण में सहायक अधिकारी को उनका हक दिलाएं। सीएसडी कैंटीन में शराब के टैक्स को खत्म करें। उपनल में पूर्व सैनिकों को कुशल का दर्जा देने के साथ-साथ पूर्व सैनिकों को रोजगार से जोड़ने के लिए पंजीकरण नियमावली बनाएं।