महारैली के दौरान हुई आमसभा में फैसला हुआ कि जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन सरकार को नोटिस भेजेगी कि एक मार्च तक आरक्षण मुक्त पदोन्नति का शासनादेश जारी किया जाए। विधानसभा सत्र में अध्यादेश लाकर पदोन्नति में आरक्षण समाप्त करने का कानून बनाया जाए। ऐसा न होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो जाएगी।
कर्मचारियों का धैर्य जवाब दे चुका है। सरकार के पास अब भी वक्त है। वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आलोक में पदोन्नति से रोक हटा दे। ऐसा न होने पर कर्मचारियों के पास बेमियादी हड़ताल पर जाने के सिवाय कोई चारा नहीं है। - दीपक जोशी, प्रदेश अध्यक्ष, उत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन
ये है मांग
जनरल ओबीसी कर्मचारियों की दो प्रमुख मांगें हैं। वे पदोन्नति से तत्काल रोक हटाना चाहते हैं। साथ ही यह भी चाहते हैं कि सीधी भर्ती के पदों में आरक्षण रोस्टर से कोई छेड़छाड़ न की जाए।
सचिवालय में कामकाज रहा ठप, विभागों में भी सन्नाटा
प्रमोशन में आरक्षण के खिलाफ आयोजित महारैली के चलते उत्तराखंड राज्य सचिवालय में कामकाज पूरी तरह से ठप रहा। सचिवालय के जनरल और ओबीसी कर्मचारी बड़ी तादाद में महारैली में शामिल होने पहुंचे। कुछ ऐसा ही सन्नाटा राजधानी स्थित कई विभागों और जिला कार्यालयों में दिखाई दिया। यहां भी कर्मचारी हाजिरी लगाकर सीधे परेड ग्राउंड पहुंच गए।
जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन की अपील पर राज्य सचिवालय में सुबह साढ़े नौ बजे कर्मचारी एटीएम चौक के बाहर इकट्ठा हुए। वहां से एक रैली की शक्ल में सीधे परेड ग्राउंड स्थित महारैली स्थल पर पहुंचे। बड़ी संख्या में जनरल ओबीसी कर्मचारियों के महारैली में जाने से सचिवालय के अनुभागों में सन्नाटा पसर गया।
अनुसेवक से लेकर अधिकारियों तक के कर्मचारियों ने बड़ी संख्या में महारैली में उपस्थिति दर्ज कराई। सचिवों और अपर सचिवों के निजी सचिव तक महारैली में शामिल हुए। शाम चार बजे के बाद उनकी वापसी के बाद सचिवालय में कुछ चहल पहल लौटी। उधर, यही आलम राजधानी के स्थित निदेशालयों और कार्यालयों में दिखा। वहां से भी कर्मचारी बड़ी संख्या में महारैली में शामिल होने पहुंचे।
कुछ कर्मचारियों के पर्स गुम
जूलूस में भीड़ का जेबकतरों ने जमकर लाभ उठाया। परेड ग्राउंड से हाथीबड़कला रास्ते पर जेबकतरों ने कई कर्मचारियों के जेल खाली कर दी। बाद में कुछ कर्मचारियों के खाली पर्स हाथीबड़कला के सामने नालियों में गिरे मिले। कुछ कर्मचारियों के पर्स गुम हो चुके थे।