मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग की ओर से निविदा के माध्यम से चयनित दो फर्मों के खिलाफ आउटसोर्स कर्मचारियों के ईपीएफ के गबन, टैक्स चोरी एवं धोखाधड़ी का मुकदमा हो सकता है। विभाग के निदेशक हरि चंद्र सेमवाल ने दोनों फर्मों को पत्र लिखकर मामले में एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।
पत्र में कहा गया है कि इससे संबंधी जरूरी प्रमाण उपलब्ध न होने पर विभाग फर्मों को ब्लैक लिस्ट कर मुकदमा दर्ज करने के लिए बाध्य होगा। विभाग के निदेशक एवं सचिव ने फर्मों को लिखे पत्र में कहा कि विभाग ने एक फर्म का चयन जनवरी 2021 से 31 मार्च 2022 तक योजना संचालन के लिए मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए किया था जबकि दूसरी फर्म का चयन वर्ष 2019 से वर्ष 2020 तक किया गया था। इन फर्मों के खिलाफ विभाग को कई तरह की शिकायतें मिली हैं।
बताया गया है कि आउटसोर्स कर्मचारियों को उनके काम का पूरा भुगतान नहीं किया गया, कर्मचारियों से नियुक्ति के समय ली गई सिक्योरिटी राशि एक समिति के खातें में जमा कराई गई। जिसे अब तक वापस नहीं किया गया। जिस फर्म का सितंबर 2020 को अनुबंध समाप्त हो गया था उसने भी अब तक सिक्योरिटी धनराशि वापस नहीं की जबकि विभाग की ओर से नियोक्ता (आउटसोर्स एजेंसी) को कर्मचारियों का पूरा मानदेय (सभी करों सहित) समय से कर दिया गया था। इसके बावजूद इस तरह की शिकायतों का मिलना गंभीर है।
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विभाग के निदेशक ने कहा कि इस तरह की शिकायतों से कहीं न कहीं विभाग की छवि भी खराब हो रही है। पत्र में कहा गया है कि कितने समय बाद कर्मचारियों को मानदेय दिया गया, ईपीएफ में आउटसोर्स कर्मचारियों का जमा अंशदान स्पष्ट यूएएन नंबर सहित दिया जाए एवं जीएसटी का पूरा विवरण दिया जाए। निदेशक ने फर्मों से कुछ अन्य जानकारी भी मांगी है। पत्र में कहा गया है कि तय समय पर जानकारी उपलब्ध न होने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।