पर्वतीय क्षेत्रों में बंद पड़े सिनेमाघरों को फिर से शुरू करने के लिए प्रदेश सरकार ने उन्हें मनोरंजन कर में पांच साल तक छूट देने का निर्णय लिया है। इससे न सिर्फ पहाड़ी क्षेत्रों में लोगों को मनोरंजन के साधन उपलब्ध होंगे, बल्कि यहां स्थानीय फिल्मों को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा और पहाड़ी बोली भाषा को प्रोत्साहन मिलेगा।
सचिव सूचना विनोद शर्मा ने बताया कि उत्तराखंड फिल्म नीति के तहत पर्वतीय इलाकों में बंद पड़े सिनेमाघरों को पुनर्जीवित करने का फैसला लिया गया है। इसके तहत प्रदेश में 1000 मीटर से ऊपर स्थित सिनेमाघरों को फिर से संचालित किया जाएगा।
यह फैसला प्रदेश में फिल्म निर्माण के लिए अवस्थापना विकास, शूटिंग स्थलों का निर्माण, प्रदर्शन के माध्यम से रोजगार उपलब्ध करने और क्षेत्रीय फिल्मों के निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए लिया गया है। बताया कि नैनीताल और मसूरी में बंद सिनेमाघर शुरू हो चुके हैं। सरकार की ओर से उनको पहले से छूट दी जा रही है। अभी भी पर्वतीय जनपदों में चार-पांच ऐसे सिनेमाघर हैं जो लंबे समय से बंद पड़े हुए हैं।