एक आने से चार आने की टिकट पर सिनेमा का लुत्फ उठाए भले ही लोगों को 50 साल बीत चुके हों।
मामूली टैक्स नहीं भरते सिनेमा संचालक
मगर आज भी निगम को सिनेमाघरों से मनोरंजन कर महज 40 रुपए प्रति माह मिलता है। शो के टिकट चार आने से 400 रुपए तक पहुंच चुके हैं, फिर भी सिनेमा संचालक यह मामूली टैक्स नहीं भरते।
अब कमाई बढ़ाने के लिए निगम यह कायदा बदलने जा रहा है। शहर के सभी सिनेमा हॉल और मल्टीप्लेक्सेस से जिला मनोरंजन विभाग हर शो के टैक्स वसूलता है। इस टैक्स में नगर निगम का भी हिस्सा है।
एक शो का टिकट एक से चार आने का था
कुछ साल पहले तक इसकी वसूली भी होती थी। नगर निगम अधिनियम के जानकार लोग बताते हैं कि टैक्स निर्धारण के वक्त सिनेमा हॉल में एक शो का टिकट एक से चार आने का था।
नगर निगम या पालिका को 40 रुपए प्रति माह मनोरंजन कर के तौर पर मिलता था। बदलते वक्त के साथ मल्टीप्लेक्सेस आए और टिकटों के रेट भी चार आने से आज 400 रुपए तक पहुंच गए। ऐसे में टैक्स स्ट्रक्चर बदलने की जरूरत महसूस की जा रही है।
विज्ञापनों के प्रसारण पर जारी होंगे नोटिस
शहर के सभी मल्टीप्लेक्सेस में इन दिनों अवैध ढंग विज्ञापन दिखाए जा रहे हैं। कायदे के मुताबिक निगम को टैक्स भुगतान बिना प्रसारण पर मेयर विनोद चमोली ने सभी पिक्चर हाल और मल्टीप्लेक्स संचालकों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने बताया विज्ञापन प्रसारण का अधिकार निगम का है। मल्टीप्लेक्स संचालकों से इसका टैक्स वसूला जाएगा।