बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने का समय नजदीक आने के साथ ही धाम में तीर्थयात्रा धीमी हो गई है। सोमवार को मात्र 72 तीर्थयात्रियों ने यहां मत्था टेका। धाम में ऊंची चोटियों में बर्फ गिरने के बाद यहां मौसम में ठंडक बढ़ गई है।
शाम और सुबह बर्फीली हवाएं चल रही हैं। जलप्रलय के बाद धाम पहुंचे व्यापारियों ने पुन: तीर्थयात्रा को देखते हुए पांच अक्तूबर से अपना व्यवसाय शुरू किया था, लेकिन अब तीर्थयात्रियों की आमद कम होने से उन्होंने अपना व्यापार समेटना शुरू कर दिया है।
बदरीनाथ धाम नारायण की तपस्थली
बदरीनाथ धाम में अगाध श्रद्धा रखने वाले कानपुर निवासी मोहन श्रीवास्तव, अरविंद मिश्रा और हर्षदीप यादव कहना है कि वे तीनों चार वर्ष से प्रतिवर्ष बदरीनाथ धाम में मत्था टेकने पहुंच रहे हैं। इस वर्ष आपदा के कारण यात्रा अक्तूबर में करनी पड़ी।
सोमवार को अपने माता-पिता को बदरीनाथ के दर्शन कराकर लौट रहे दिल्ली निवासी कन्हैया लाल का कहना है कि बदरीनाथ धाम नारायण की तपस्थली है। इस वर्ष अपने माता-पिता को बदरीनाथ के दर्शन कराने का संकल्प लिया था।
आपदा के बाद यात्रा शेड्यूल बदलना पड़ा। इधर, बदरीनाथ के मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह ने बताया कि बदरीनाथ की पूजा नियमित चल रही हैं। कई तीर्थयात्रियों के गुप्त दान और पूजा की बुकिंगें मिल रही हैं।