फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कृष्ण के लिए इंग्लैंड की मैरी बन गई मीरा

Thu, 28 Aug 2014 03:04 PM IST
नवीन भट्ट / अमर उजाला, रानीखेत (अल्मोड़ा)
विज्ञापन
विज्ञापन
कहते हैं कि भक्ति में शक्ति होती है। इंग्लैंड की मैरी एलिजाबेथ फिंज इसकी उदाहरण हैं। कृष्ण की भक्ति मैरी को 54 साल बाद उनकी जन्म भूमि रानीखेत खींच लाई।
विज्ञापन


मैरी का जन्म 1960 में रानीखेत के सेना अस्पताल में हुआ था। जन्म के साथ ही माता-पिता उन्हें इंग्लैंड ले गए थे। 22 साल की उम्र में मैरी का अध्यात्म के प्रति जुड़ाव हुआ, तब से उन्होंने भागवत गीता सहित तमाम आध्यात्मिक पुस्तकों का अध्ययन शुरू किया।

कृष्ण भक्ति के लिए 15 साल पहले वह मथुरा के वृंदावन धाम स्थित आश्रम आ गईं। यहां उनके गुरु वेदांत नारायण स्वामी महाराज ने उनका भारतीय नाम मधुस्मिता दासी रख दिया।
विज्ञापन


अब वीजा की अनिवार्यता खत्म करने के लिए वह ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया कार्ड (ओसीआई) बना रही हैं, इसके लिए जन्म प्रमाणपत्र बनवाने वह अपनी जन्म भूमि रानीखेत आईं और छावनी परिषद से जन्म प्रमाणपत्र बनाकर वृंदावन लौट गई हैं।

श्री गुरुमंत्र और श्री चैतन्य महाप्रभु मंत्र का जाप

यहां राजदीप होटल में मैरी ने बताया कि उनके पिता स्व. जॉन फिंच इंग्लैंड के ससेक्स शहर से 1951 में भारत आए और दिल्ली के चांदनी चौक स्थित क्रिश्चियन बुक डिपो में कार्य करने लगे।

1960 में जून के महीने में जब उनकी माता गर्भवती थी तो दिल्ली में बहुत गर्मी थी। डिलीवरी के लिए माता को रानीखेत के सेना अस्पताल रेफर किया गया था। जन्म के तीन माह बाद ही माता-पिता उन्हें लेकर इंग्लैंड लौट गए थे।

मधुस्मिता बताती हैं कि कृष्ण की भक्ति उनके मन में बचपन से ही थी। जैसे-जैसे उम्र बढ़ी तो वह अध्यात्म की ओर ध्यान बढ़ता गया।

1999 में वह वृंदावन आ गईं और तब से श्री भक्ति वेदांत नारायण स्वामी महाराज को गुरु मानकर उनकी सेवा कर रही हैं। मधुस्मिता ने टूटी-फूटी हिंदी भी सीख ली है।

वह बताती हैं कि वह सुबह साढ़े तीन बजे उठ जाती हैं। स्नान के बाद श्री गुरुमंत्र, श्री चैतन्य महाप्रभु मंत्र का जाप करती हैं। इसके बाद एक घंटा मंगल आरती भी गाती हैं।

आश्रम की सफाई, बाजार का सामान आदि खरीदने में दिन निकल जाता है। वह वृंदावन धाम को ही अपना घर मानती हैं।
विज्ञापन

पहाड़ पर सफर करते वक्त लग रहा था डर

मैरी एलिजाबेथ फिंज उर्फ मधुस्मिता दासी जन्म के बाद पहली बार रानीखेत पहुंची हैं। उन्होंने सफेद साड़ी धारण की हुई थी। वह कहती हैं कि शहर बहुत अच्छा है, लेकिन जंगलों का दोहन अधिक हो रहा है।

जो कि पर्यावरण के लिए घातक होगा। पहाड़ पर सफर करते वक्त उन्हें काफी डर लग रहा था, वह कहती हैं कि अपने जीवन में पहली बार इतना डरी हैं। उन्होंने कैंट कार्यालय परिसर में माता-पिता की स्मृति में पेड़ भी रोपे।

ओसीआई कार्ड हो तो वीजा की जरूरत नहीं
ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया कार्ड भारत सरकार के गृह मंत्रालय से बनता है। इसके लिए भारत में जन्म होना जरूरी है। कार्ड बनने से वीजा की जरूरत नहीं पड़ती है।

मुधस्मिता कहती हैं कि वह काफी मितव्यता से चल रही हैं, क्योंकि उसके पास जो भी पैसा है वह ठाकुर जी और उनके गुरुदेव का है। श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन उन्होंने दिन भर पानी पिए बगैर व्रत धारण किया था।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें