कैम्पटी और गलोगी में एनडीएमए की दो दिवसीय कार्यशाला हुई, जिसमें विशेषज्ञों ने कह कि भूस्खलन का सही स्टडी के बाद उपचार हो सकता है।
उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की भूस्खलन जोखिम न्यूनीकरण योजना के तहत कार्यशाला आयोजित की गई। दूसरे दिन विशेषज्ञों के साथ कई विभागों के अधिकारियों ने मसूरी स्थित कैम्पटी और गलोगी में चल रहे भूस्खलन ट्रीटमेंट के कार्यों को मौके पर जाकर देखा।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता लोकेश सारस्वत ने कैम्पटी में चल रहे भूस्खलन ट्रीटमेंट संबंधी कार्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा, यहां पहाड़ी ढाल पर पानी के प्रवाह को व्यवस्थित करने के लिए सीढ़ीदार नालियां बनाई गई हैं।
ताकि, राज्य के अन्य भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में इसका लाभ मिल सके। इस दौरान सिंचाई विभाग एई सुरेश तिवारी, दीपक जोशी, आरडब्ल्यूडी के एई उत्तम सिंह, यूएसडीएमए के विशेषज्ञ तंद्रीला सरकार, भू-वैज्ञानिक जेसिका टेरॉन, उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र के सहायक अभियंता सार्थक चौधरी, अमित गैरोला, सुखचैन, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से दीपाली जिंदल व बीआरओ के कर्नल प्रदीप शर्मा मौजूद रहे।