engineers siblings with father
- फोटो : amar ujala
अभय ने बताया कि दो साल पहले जंगल में उन्हें जख्मी हाथी दिखा। वन विभाग के कर्मचारियों से जख्म के बारे में पूछा तो पता चला कि खेत में घुसने पर किसान ने हमला किया तो हाथी घायल हो गया। भाई-बहन किसान के पास पहुंचे तो उसने बताया कि जंगली जानवरों की वजह से खेती चौपट हो गई है।
किसान जमीनें बेचकर शहरों में नौकरी करने को लाचार हैं। उसी समय भाई और बहन ने इस समस्या के खात्मे की ठानी और वन्य जीवों को नुकसान पहुंचाए बिना उन्हें खेतों से दूर खदेड़ने के उपाय खोजना शुरू किया।इस प्रयास में उन्होंने एनाइडर्स नाम का उपकरण बनाया। सौर ऊर्जा से चलने वाला यह उपकरण वन्य जीवों के खेतों की तरफ आने पर हूटर बजा कर रोशनी करता है।
इससे जानवर खेतों की तरफ न आकर वापस चला जाता है। इस उपकरण को विश्व प्रकृति निधि (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) ने एक साल तक कोटाबाग के मनकटपुर में लगाया जहां सकारात्मक परिणाम मिले। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ अब इस उपकरण का परीक्षण बिहार, उप्र, असम में भी करेगा।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ से प्रोत्साहन मिलने के बाद अब राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण भी जीवों से होने वाले सड़क हादसों में इसका परीक्षण करने जा रहा है। गुड़गांव के पास टोल प्लाजा से दोनों तरफ 200-200 मीटर दूरी पर यह उपकरण लगाया जाएगा। जैसे ही कोई भी वन्य जीव आएगा तो यह उपकरण टोल सुरक्षा कर्मियों को संदेश पहुंचा देगा।
जल्द ही तैयार होंगे नए वर्जन
अभय और स्मृतिका ने बताया कि जल्द ही नए वर्जन बनाए जा रहे हैं। इसमें हर बार जानवर के आने पर अलग-अलग आवाजें आएंगी। रात को यह खुद ब खुद चालू हो जाएगा और सुबह चार्ज होगा। इसमें संदेश भेजने का फीचर जोड़ा जा रहा है जो बैट्री डाउन होने, वन्य जीव के आने पर खेत स्वामी और वन कर्मी को संदेश देगा।