कर्मचारियों को पदोन्नति व एसीपी का लाभ दिए जाने के साथ ही वित्तीय घोटालों में लिप्त अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने जैसी 11 सूत्री मांगों को लेकर उत्तराखंड वन विकास निगम कर्मचारी संगठन से जुडे़ पदाधिकारी व कर्मचारी शुक्रवार को निगम मुख्यालय पर जमकर गरजे। मुख्यालय गेट पर तंबू डालकर धरना प्रदर्शन कर रहे अधिकारियोें को मुख्य दरवाजे से कार्यालय में भी नहीं घुसने नहीं दिया। ऐसे में अधिकारियों को पिछले दरवाजे से अपने अपने कार्यालयों में जाना पड़ा। कर्मचारियों के आंदोलन के चलते प्रबंध निदेशक समेत आला अधिकारियों को अपनी गाड़ियां मुख्यालय के बाहर ही पार्क करनी पड़ी।
धरना प्रदर्शन के दौरान पदाधिकारियों व कर्मचारियों ने प्रबंधन के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। वक्ताओं ने कहा कि साल 2002 में नियमित हुए कर्मचारियों को अदालत के आदेश के बावजूद 1991 में दी गई वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति नहीं दी जा रही है। कर्मचारियाें की मांगों को पूरा करने के बजाए सरकार व शासन उनको गुमराह की रहे हैं।
धरने को वन विकास निगम कर्मचारी संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष पूरण सिंह बिष्ट, महामंत्री हरदेव सिंह रावत, मधुसूदन लोहनी, क्षेत्रीय अध्यक्ष कमलापति सनवाल, घनश्याम कश्यप, प्रेम सिंह चौहान, प्रमोद नारंग, संतोष रावत, सूर्यप्रकाश राणाकोटी, प्रवीण रावत, विजय खली, टिहरी क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष गिरीश नैथानी, क्षेत्रीय अध्यक्ष गढ़वाल क्षेत्र जेपी बहुखंडी, निगम कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष संतोष रावत समेत कई पदाधिकारियों ने संबोधित किया। अध्यक्षता भुवन चंद्र बिष्ट व संचालन ओमप्रकाश ने किया।
ये हैं कर्मचारियाें की प्रमुख मांगें
- अदालत के आदेश के मुताबिक कर्मचारियों की वरिष्ठता को बहाल किया जाए।
- स्केलर संवर्ग की दैनिक सेवाकाल की दो वर्ष की अवधि को एसीपी व प्रोन्नति में समायोजित किया जाए।
- सभी संवर्गों में खाली पड़े पदों पर नियुक्ति की जाए।
- फील्ड कर्मचारियों को यात्रा भत्ता की सुविधा दी जाए।