ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट ने आईईईई, डीआरडीओ और सर्ब इंडिया के सहयोग से दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया। सम्मेलन में विशेषज्ञों ने भविष्य की संचार तकनीकों पर विचार साझा किए।
विशेषज्ञों ने कहा कि भविष्य के नेटवर्क अधिक स्मार्ट, तेज व परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने में सक्षम होंगे जहां सभी डिवाइस मिलकर एक मजबूत डिजिटल सिस्टम बनाएंगे जो सभी कामों को सरल बनाएंगी। सम्मेलन में भारत सरकार के संचार मंत्रालय के नेशनल कम्युनिकेशंस अकादमी के निदेशक अतुल जोशी ने कहा कि डिवाइस इंटेलिजेंस आने वाले समय में संचार नेटवर्क की दिशा और क्षमता दोनों में बड़े बदलाव लाएगी। उन्होंने कहा कि 5जी एडवांस्ड और 6जी के युग में ऐसी तकनीकें न केवल तेज और विश्वसनीय संचार सुनिश्चित करेंगी बल्कि पूरी तरह से कनेक्टेड डिजिटल इकोसिस्टम के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी जो देश के डिजिटल विकास को नई गति देगा।
वहीं आईआईटी रुड़की के प्रो. सुदेब दासगुप्ता ने कहा कि कम तापमान पर कार्य करने वाले इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स भविष्य की उन्नत तकनीकों के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारत सरकार के नवीन व नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान के महानिदेशक प्रो. मोहम्मद रिहान ने कहा कि आने वाले समय में नवीकरणीय ऊर्जा के साथ उन्नत तकनीकों का समन्वय भी महत्वपूर्ण है। अमेरिका के टेक्सास के एएमडी कंपनी के डाॅ. हर्ष शर्मा भी सम्मेलन में ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।
दो दिवसीय इस सम्मेलन में कुल दस तकनीकी सत्र आयोजित किए गए हैं जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित चिप डिजाइन, हेटेरोजीनियस चिपलेट आर्किटेक्चर, रीकॉन्फिगरेबल इंटेलिजेंट सरफेस, 5जी एडवांस्ड व 6जी संचार तकनीक, क्रायोजेनिक सिस्टम्स और उन्नत वायरलेस नेटवर्क जैसे विषयों पर चर्चा की गई। सम्मेलन में देश विदेश के विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से भाग लिया। सम्मेलन में यूनिवर्सिटी के प्रो वीसी डाॅ. संतोष एस. सर्राफ, कुलसचिव डाॅ. नरेश कुमार शर्मा, डिपार्टमेंट हेड डाॅ. मो. इरफानुल हसन, प्रो. निकोला मार्केट्टी, डाॅ. मृदुल गुप्ता, डाॅ. अभय शर्मा समेत अन्य लोग उपस्थित रहे।