दून अस्पताल में भर्ती डेंगू के मरीज ।
स्वास्थ्य सचिव और जिलाधिकारी के निर्देश के बाद आखिरकार गांधी शताब्दी और कोरोनशन अस्पताल में एलाइजा रीडर मशीन लग गई है। बुधवार से यहां एलाइजा जांच शुरू हो जाएगी। इससे डेंगू पीड़ित मरीजों को राहत मिलेगी। साथ ही दून अस्पताल पर भी दबाव कम होगा।
शहर और उसके आसपास के क्षेत्रों में डेंगू खतरनाक रूप ले चुका है। स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम डेंगू पर रोकथाम के हरसंभव प्रयास के दावे कर रहे हैं। इसके बावजूद न तो डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छर पर रोकथाम लग पा रही है और न ही डेंगू का प्रकोप कम हो रहा है। इससे सरकारी अस्पतालों में भी मरीज बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। एकमात्र सरकारी अस्पताल, राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल की लैब में एलाइजा जांच की सुविधा होने के कारण वहां पर सैंपल की भीड़ लग जा रही है। जांच रिपोर्ट के लिए भी मरीजों को ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है।
23 अगस्त को जिलाधिकारी सी. रविशंकर और 24 अगस्त को सचिव स्वास्थ्य नितेश झा ने दून, कोरोनेशन और प्रीतम रोड स्थित गांधी शताब्दी अस्पतालों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया था। इन अधिकारियों ने गांधी शताब्दी, कोरोनेशन और रायपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी एलाइजा रीडर मशीन लगाने के निर्देश दिए थे। गांधी शताब्दी और कोरोनेशन अस्पताल के सीएमएस डॉ. बीसी रमोला ने बताया कि मंगलवार से दोनों अस्पतालों में जरूरत के हिसाब से एलाइजा जांच शुरू कर दी जाएगी। देहरादून के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसके गुप्ता ने बताया कि डेंगू की रोकथाम और उपचार के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। अब रायपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी एलाइजा रीडर मशीन लगाई जाएगी।
निजी अस्पतालों के सैंपल भी भेजेंगे गांधी शताब्दी अस्पताल
दून अस्पताल में रोजाना औसतन 330 मरीजों की एलाइजा जांच की जा रही है। इसमें लगभग 80 ऐसे सैंपल हैं जो निजी अस्पतालों से री-टेस्ट के लिए आ रहे हैं। दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा ने माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष को पत्र लिखकर ऐसे सैंपल को गांधी शताब्दी और कोरोनेशन अस्पताल भेजने के लिए पत्र लिखा है।