अभी तक कॉलर किए गए वन्यजीवों पर जर्मनी के रेडियो कॉलर लगाए गए हैं। सेटेलाइट से जुड़े इन पट्टों का फीड सीधे जर्मन की संबंधित संस्था को ही मिल रहा है। अब वन विभाग ने जर्मनी से कहा है कि डाटा फीड उन्हें भी उपलब्ध कराया जाए। गूगल मैप पर इन वन्यजीवों की स्थिति का पता लगता रहता है। इसमें हर एक घंटे में लोकेशन जानी जा सकती है।
दोनों तरफ से कम्यूनिकेशन संभव
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इन रेडियो पट्टों की खासियत ही यह है कि वन्यजीव अगर परेशान हो रहा है तो दूर बैठे ही इन पट्टों को गिराया जा सकता है। भारत सरकार के साथ जीआईजेड परियोजना के तहत ये पट्टे लगाए जा रहे हैं।
इतना आसान भी नहीं है रेडियो कॉलर लगाना
मुसीबत यह है कि हाथी बड़ा जानवर है और पट्टा लगाने के लिए उसे बेहोश करना जरूरी है। राजाजी पार्क में ही कुछ समय पहले एक गजराज को देखकर वन विभाग के पसीने छूट गए थे। अन्य हाथियों की तुलना में इस हाथी पर रेडियो कॉलर लगाने में खासी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
15 गुलदार और छह बाघों पर भी लगेंगे कॉलर
मंगलवार को वन विभाग ने एक गुलदार पर रेडियो कॉलर लगाया। इसी तरह अकसर आबादी क्षेत्र में आने वाले 14 और गुलदारों पर ये रेडियो कॉलर लगाए जाएंगे। कार्बेट के छह बाघों को कॉलर लगाने की अनुमति भी वन विभाग को मिल गई है।
कुंभ के दौरान 10 हाथियों को रेडियो कॉलर करने की अनुमति केंद्र से मिल गई है। इन पट्टों की वजह से वन्यजीवों का मूवमेंट ट्रेक किया जा सकता है। इसी को देखते हुए अब कुंभ के दौरान यह काम किया जा रहा है।
- जेएस सुहाग, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक