करीब 10 से 13 फीसदी फसलों को पहुंचाते हैं नुकसान
इस साल हरिद्वार क्षेत्र में बारिश कम हुई है। सितंबर से पहले ही हाथियों के झुंड ने पहाड़ से मैदान में उतरना शुरू कर दिया है। झुंड लगातार राजाजी रिजर्व के मैदानी इलाकों में आ रहे हैं। हाथियों के मैदानी इलाकों में उतरने ही किसानों और वन विभाग की चिंताएं बढ़ गई हैं। हाथी हर साल धान और गन्ने की करीब 10 से 13 फीसदी फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं।
बासमती धान और गन्ने की खुशबू हाथियों को आकर्षित करती है। धान में बालियां आनी शुरू हो गई हैं। गन्ना भी छह फीट तक पहुंचने लगा है। दोनों ही हाथियों के सबसे प्रिय भोजन हैं। खेतों में पहुंचने के बाद हाथियों को भगाना काफी मुश्किल होता है। हाथी फसलों को खाने से अधिक रौंदकर बर्बाद कर देते हैं। वन विभाग ने आबादी एरिया में हाथियों की रोकथाम के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं।
इसलिए झुंड में चलते हैं हाथी
हाथी की उम्र इंसान की तरह होती है। औसतन स्वस्थ हाथी 80 साल तक जीवित रहता है। 20 साल की उम्र तक हथिनी मां बन जाती है। उम्रदराज हथिनी ही परिवार में मुखिया होती है। झुंड में हथिनी की तीन पीढ़ियां तक साथ चलती हैं। खतरे की आशंका होने पर हथिनी ही हमला करती है। औसतन प्रतिदिन हाथियों का झुंड 40 किमी से अधिक सफर कर सकता है।
शिवालिक पर्वतमालाओं की पहाड़ियों से हाथी उतरकर मैदानी जंगलों में आने लगे हैं। वन विभाग की ओर से हाथियों को आबादी क्षेत्र के खेतों में आने से रोकने के लिए गश्ती बढ़ा दी गई है।
- महेंद्र गिरी, रेंजर मोतीचूर रेंज, राजाजी टाइगर रिजर्व
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हाथियों के झुंड हर साल फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। लालढांग और पथरी में सर्वाधिक नुकसान होता है। दोनों क्षेत्र जंगलों से सटे हैं।
- दिनेश प्रसाद नौड़ियाल, रेंजर हरिद्वार वन प्रभाग