नरेंद्रनगर वन प्रभाग ने हेंवल नदी के किनारे रोहिणी, बांज, आंवला, बेल, अमलतास, अर्जुन और जामुन के पेड़ लगाए हैं। हाथी को ये सभी वृक्ष काफी पसंद हैं। जिससे अपने पसंदीदा भोजन का आनंद लेते हुए हाथी अपने झुंड से काफी दूर पहाड़ आ पहुंचा होगा। हाथी के बेमुंडा के जंगल तक पहुंचने से विभागीय अधिकारी-कर्मचारी भी काफी गदगद हैं।
शिवालिक एलीफेंट रिजर्व में हाथियों की संख्या अच्छी खासी बढ़ गई है। बेमुंडा के जंगलों में हाथी का पसंदीदा भोजन पेड़-पौधे हैं। ऐसे में संभव है कि बेमुंडा में भोजन और पानी की प्रचूर मात्रा की उपलब्धता के कारण हाथी अपने नए ठिकाने की तलाश कर रहा हो। हाथी की पूरी मॉनिटरिंग करने के बाद उसे वापस झुंड की ओर लौटा दिया गया था।
-धर्म सिंह मीणा, डीएफओ नरेंद्रनगर वन प्रभाग।
नरेंद्रनगर वन प्रभाग के शिवालिक एलीफेंट रिजर्व में हाथियों की गणना शुरू की गई है। विभाग ने गिनती करने के लिए 12 विशेषज्ञों की टीम गठित की है। हाथियों की सटीक गणना के लिए टीम को ड्रोन कैमरे और जीपीएस तकनीक से लैस किया गया है। इस दौरान हाथी की आयु संबंधी जानकारियां भी जुटाई जाएगी।
एक घंटे में 24 किमी तक अपना ठिकाना बदलने वाले हाथियों की गणना करना कठिन काम है। इस चुनौती से निपटने के लिए विभाग पहली बार ड्रोन कैमरे का इस्तेमाल कर रहा है। शनिवार को नरेंद्रनगर वन प्रभाग के शिवपुरी और नरेंद्रनगर रेंज में विभाग की 12 प्रशिक्षित टीमों ने हाथियों की आबादी का आकलन करने का काम शुरू किया।
हाथियों की गणना का सटीक परिणाम जानने के लिए टीमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष विधि का इस्तेमाल कर रही हैं। निश्चित समय में सभी टीमें हाथियों की गणना करेगी, जिससे एक हाथी की गिनती दूसरी जगह न हो सके। डीएफओ धर्म सिंह मीणा ने बताया कि हाथियों की गणना का काम तीन दिन तक चलेगा। सटीक परिणाम जानने के लिए पारंपरिक विधि के साथ ही ड्रोन कैमरे की मदद भी ली जा रही है। इसके लिए टीमों को एक प्रपत्र भी दिया गया है।