हाथियों के उत्पात से निपटने के लिए वन विभाग उसके लीडर पर सेटेलाइट कालर लगाएगा। लीडर पर नजर रखकर रेस्क्यू आपरेशन चलेगा और झुंड को काबू किया जाएगा।
खूब उत्पात मचा रहे हैं हाथी
यह फैसला अपर प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव जीएस खाती की अध्यक्षता में बुधवार को हुई मीटिंग में लिया गया। तिकोनिया में वन संरक्षक कार्यालय में हुई मीटिंग में कुमाऊं के वनाधिकारी शामिल हुए। तराई केंद्रीय वन प्रभाग के जंगल में 25 हाथियों का झुंड फंस गया है।
बिंदुखत्ता में अतिक्रमण, दूसरे निर्माण आदि काम के चलते भी हाथी मूवमेंट नहीं कर पा रहे हैं। इसके चलते हल्दूचौड़, रामपुर रोड से जुड़े कई गांवों में हाथियों का उत्पात है। वह जंगल छोड़कर धान, गन्ना आदि खाने को खेतों में घुस रहे हैं। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ गया है।
मीटिंग में तय हुआ कि इन हाथियों को ट्रंकोलाइजर गन से बेहोश कर दूसरी जगह पर छोड़ दिया जाए। लेकिन, इतने हाथियों को बेहोश करने और दूसरी जगह पर छोड़ने को लेकर व्यावहारिक समस्याओं के चलते प्लान को कैंसल कर दिया गया।
अब तय हुआ कि हाथियों के झुंड (हथिनी झुंड का नेतृत्व करती है, उसके पीछे दूसरे हाथी चलते हैं) के लीडर को बेहोश कर सेटेलाइट कालर लगा दिया जाए। ऐसे में जब यह हथिनी और उसके पीछे झुंड चलेगा, तो सेटेलाइट से मूवमेंट का पता चल जाएगा, जिसके बाद रेस्क्यू टीम को तत्काल मौके पर भेजकर स्थिति को नियंत्रित किया जा सकेगा।
इस दौरान सीसीएफ कुमाऊं परमजीत सिंह, सीएफ सुरेंद्र मेहरा, डीएफओ सनात, राहुल समेत कुमाऊं के वनाधिकारी मौजूद थे।
अन्य फैसले
- जंगल में गश्त को दो-दो हाथी हर प्रभाग में दिए जाएंगे।
- रेस्क्यू और शिकारियों से लड़ने को दो करोड़ के हथियार लेंगे।
- फील्ड स्टाफ को गश्त के लिए बढ़िया जूते, किट आदि मिलेंगे।
- डीएफओ खुद गश्त करने के साथ सुविधाओं को जांचेंगे।
- किसी भी वन्यजीव के चिन्ह, प्रत्यक्ष दिखने पर उसका उल्लेख डायरी में करना होगा।
- मैपिंग आदि कार्य किया जाएगा।