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कॉर्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व में 2026 पहुंची हाथियों की संख्या, तीन साल में हुई 10 फीसदी बढ़ोतरी

Tue, 30 Jun 2020 12:10 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : फाइल फोटो
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प्रदेश में गजराजों का कुनबा बढ़ गया है। 2017 में प्रदेश में हाथियों की संख्या 1839 थी जो अब बढ़कर 2026 हो गई है। हाल ही में ड्रोन के जरिये किए गए सर्वे से इसकी पुष्टि हुई है। 

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प्रदेश में बाघों के बाद अब हाथियों को लेकर भी सुकून देने वाली खबर है। सोमवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई राज्य वन्यजीव बोर्ड की सचिवालय में हुई बैठक में हाथी गणना की जानकारी दी गई। यह गणना जून माह में ड्रोन के जरिए की गई थी।

बताया गया कि पिछले तीन सालों में प्रदेश में करीब 87 हाथी बढ़े हैं।  प्रदेश में सबसे अधिक हाथी कार्बेट में हैं। यहां 2015 में हाथियों की संख्या 1045 थी जो इस समय बढ़कर 1224 हो गई है। रामनगर वन प्रभाग में 1011 हाथी पाए गए। भागीरथी और नरेंद्रनगर वन प्रभाग में हाथी नहीं पाए गए जबकि हरिद्वार वन प्रभाग में इनकी संख्या 113 पाई गई। इसी तरह राजाजी पार्क में 311 हाथी हैं। 
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इससे पहले बाघों की गणना में भी प्रदेश के लिए राहत भरी खबर आई थी। प्रदेश में बाघों की संख्या में भी खासा इजाफा हुआ था। दूसरी ओर, शहरीकरण और जंगल में हो रहे बदलाव से सबसे अधिक हाथी ही प्रभावित हैं। इसके बावजूद इनकी संख्या में इजाफा होने को वन विभाग अपनी संरक्षण की कोशिश का नतीजा मान रहा है। 

कब कितने हाथी थे
2012................1559
2015................1488
2017 ..............1839
2020...............2026

व्यस्क नर-    304, जिसमें टस्कर-282, अन्य-22
व्यस्क मादा- 771
05 से 15 साल के बीच- 447,
एक साल से पांच साल तक- 285
एक साल से कम- 172
हाथी जिनकी उम्र की पहचान नहीं हो पाई- 47

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जलीय जीवों की संख्या में भी हुई बढ़ोतरी

सीएम त्रिवेंद्र ने बताया कि  प्रदेश में जलीय जीवों की संख्या में भी बढोतरी हुई है। 22 से 24 फरवरी 2020 तक जलीय जीवों की गणना की गई थी। इसमें पाया गया कि प्रदेश में 451 मगरमच्छ, 77 घड़ियाल और 194 ऊदबिलाव हैं। बताया गया कि वर्ष 2020 से 2022 तक राज्य में स्नो-लैपर्ड की जनसंख्या का आंकलन भी किया जाएगा। 

बैठक में उन्होंने बताया कि कार्बेट टइगर रिजर्व और राजाजी टाईगर रिजर्व में बाघों और जंगली हाथियों की धारण क्षमता का अध्ययन भारतीय वन्यजीव संस्थान से कराने के लिए प्रस्ताव प्राप्त हो गया है। इसी प्रकार गैण्डे के रिइन्ट्रोडक्शन के लिए साइट सूटेबिलिटी रिपोर्ट मिल गई है। 
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