एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में बोर्ड ने एनएच72ए के तहत डाट काली मंदिर से आशारोड़ी चौकी तक की करीब चार किलोमीटर सड़क के लिए वन भूमि हस्तांतरण को भी मंजूरी दी। बोर्ड बैठक की अध्यक्षता करते हुए सीएम ने कहा कि एनएच72ए बेहद महत्वपूर्ण है और इससे संबंधित परियोजना को समय से पूरा किया जाए। बोर्ड ने आरक्षित और संरक्षित वन क्षेत्र से बाहर के क्षेत्रों में बंदरों और जंगली सुअरों को उत्पीड़क घोषित करने का प्रस्ताव भी राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड को भेजा हैै।
कॉर्बेट में गैंडों को फिर से लाने की कवायद
कॉर्बेट में गैंडों को फिर से लाने के लिए अब तीन माह में काम पूरा किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में भारतीय वन्यजीव संस्थान की रिपोर्ट मिल गई है। इसी तरह राजाजी और कार्बेट में जंगली कुत्तों को भी छोड़ा जाना है। कार्बेट और राजाजी में हाथयों और बाघों की धारण क्षमता की रिपोर्ट भी भारतीय वन्यजीव संस्थान ने दी है।
राजाजी पार्क की सीमा को लेकर कमेटी गठित
राजाजी पार्क की सीमा के निर्धारण को लेकर संबंधित क्षेत्र के जिलाधिकारियों, डीएफओ और वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों की टीम का गठन कर लिया गया है।
एंगलिंग पर फिर से मांगा प्रस्ताव
प्रदेश में एंगलिंग (मछली पकड़कर छोड़ने) को लेकर बोर्ड ने वन विभाग से फिर से प्रस्ताव तैयार करने को कहा है। वन विभाग ने एंगलिंग की अनुमति से पूर्व पशु क्रूरता अधिनियम के तहत पड़ताल करने को कहा था।
सौंग बांध और जौलीग्रांट के लिए भी मंजूरी
बोर्ड ने सौंग बांध के लिए 127 हेक्टेयर और जौली ग्रांट हवाई अड्डे के विस्तार के लिए 87 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण के लिए राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड को प्रस्ताव भेजने को मंजूरी दी।
राज्य वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति बनेगी
राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की तर्ज पर ही राज्य वन्यजीव बोर्ड की वन मंत्री की अध्यक्षता में स्थायी समिति बनेगी। वन मंत्री ने बताया कि स्थायी समिति बनने से बोर्ड के प्रस्ताव समय से तैयार हो पाएंगे।
किसी भी फैसले का पालन समय से हो और आउटपुट दिखाई दे। किसी भी बैठक के मिनट उसी दिन बनें। राजाजी पार्क के तहत चौरासी कुटिया का विकास सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर किया जाए। आरक्षित वन क्षेत्रों में टोंगिया गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा देने और वन क्षेत्र से विस्थापित गांवों की भूमि के लिए डिनोटिफिकेशन जल्द किया जाए।
- त्रिवेंद्र रावत, मुख्यमंत्री उत्तराखंड
केंद्र ने उत्तराखंड को राष्ट्रीय राजमार्ग के विकास के लिए 340 करोड़ रुपये दिए हैं। केंद्र सरकार की ओर से पिथौरागढ़ में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के अधीन बन रही सड़कों के निर्माण के लिए अतिरिक्त राशि जारी करने से पिथौरागढ़ जिले में चीन सीमा के लिए बन रही सड़कों के निर्माण में तेजी आएगी।
चीन और नेपाल सीमा से लगा होने के कारण पिथौरागढ़ जिले की सड़कें सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। इस समय जिले में धारचूला और मुनस्यारी की सड़कें बीआरओ के अधीन हैं। पिछले डेढ़ दशक से बन रही घट्टाबगड़-लिपुलेख सड़क को इस साल चीन सीमा तक जोड़कर बीआरओ ने बड़ी सफलता पाई है। धारचूला के तवाघाट से करीब 95 किमी लंबी यह सड़क बनने से भारत की चीन सीमा तक पहुंच आसान हो गई है।
सुरक्षा बलों के जवानों के साथ ही माइग्रेशन पर जाने वाले स्थानीय लोगों को भी काफी सहूलियत मिली है। हालांकि अभी कुछ स्थानों पर सड़क चौड़ीकरण होना है। इसके बाद सड़क हॉटमिक्स होगी। कुछ स्थानों पर अभी पुल भी बनने हैं। बुंदिगाड़ और मालपा में बीआरओ ने पुल बना लिए हैं। मुनस्यारी से मिलम के लिए बन रही सड़क भी बीआरओ के अधीन है। करीब 80 किमी लंबी इस सड़क में 18 किमी लंबी चट्टानें बाधक बनी हैं।
इन कठिन चट्टानों को काटने के लिए हेलीकॉप्टर से मशीनें और अन्य उपकरण मिलम पहुंचाए गए हैं। सीमा पर चीनी सैनिकों की हरकतों को देखते हुए सड़कों का निर्माण कार्य तेज कर दिया है। केंद्र की ओर से अतिरिक्त राशि मिलने से सीमा के लिए बन रही सड़कों के निर्माण कार्य में तेजी आएगी और उचित रखरखाव भी होने की उम्मीद है।