बिजली उत्पादन घटा, बाजार से रोजाना 12 एमयू तक खरीद
प्रदेश में सर्दियों की आहट के साथ ही जल विद्युत परियोजनाओं से बिजली का उत्पादन कम होने लगा है। यूपीसीएल को एक बार फिर बाजार की बिजली पर उपलब्ध होना पड़ रहा है। हालत यह हैं कि प्रदेश में इस समय 36 से 37 मिलियन यूनिट की डिमांड के मुकाबले 24 से 25 मिलियन यूनिट बिजली केंद्रीय व राज्य पूल से उपलब्ध हो पा रही है। बरसात के बाद केंद्र व राज्य से मिलने वाली बिजली की उपलब्धता 35 मिलियन यूनिट तक पहुंच जाती है। सेंट्रल सेक्टर के ज्यादातर हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट उत्तर भारत में होने के कारण यहां बिजली उत्पादन कम हुआ है तो यूजेवीएनएल का उत्पादन भी घट गया है। फिलहाल, यूपीसीएस रोजाना 10 से 12 मिलियन यूनिट बिजली बाजार से खरीद रहा है।
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महंगी हुई बिजली, फ्यूल चार्ज एडजस्टमेंट की दरें बढ़ी
प्रदेश में सभी उपभोक्ताओं (बीपीएल को छोड़कर) के लिए बिजली फिर महंगी हो गई है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने फ्यूल चार्ज एडजस्टमेंट (एफसीए) की दरें जारी कर दी हैं। आयोग ने एक अक्तूबर से 31 दिसंबर के लिए एफसीए की दरें घोषित की हैं, जिनमें घरेलू उपभोक्ताओं से 10 पैसे, सरकारी संस्थानों से 14, कॉमर्शियल से 15 पैसे, प्राइवेट ट्यूबवेल से पांच पैसे, कृषि गतिविधियों से छह पैसे प्रति यूनिट अतिरिक्त वसूली की जाएगी। वहीं, एलटी उद्योगों से 14 पैसे, एचटी उद्योगों से 14 पैसे वसूला जाएगा। यह जुलाई-सितंबर के बीच के एफसीए से सात पैसे अधिक है। बता दें कि, उपभोक्ताओं के लिए इससे पहले अप्रैल में नई बिजली दरें आयोग ने लागू की थी, हाल ही में यूपीसीएल की पुनर्विचार याचिका पर भी दरें बढ़ाई थीं।