उत्तराखंड में जल विद्युत परियोजनाओं के भरोसे बिजली संकट खत्म कर पाना संभव नहीं है। प्रदेश को ऊर्जा सरप्लस स्टेट बनाने के लिए कोल और गैस विद्युत प्लांट की जरूरत है।
राज्य के गठन के बाद से लेकर अब तक जल विद्युत परियोजनाओं के अलावा दूसरे विकल्प पर विचार नहीं किया गया। कोल और गैस आधारित परियोजनाओं को लेकर अभी तक प्रदेश सरकारों ने चुप्पी साधे रखी, जबकि इन परियोजनाओं के बिना बिजली संकट से उबर पाना संभव नहीं है।
पूरे साल बिजली संकट
बारिश के दिनों में गाद आने से जल विद्युत परियोजनाएं बंद हो जाती हैं। जबकि, सर्दी में पानी की कमी से जल विद्युत परियोजनाओं से उत्पादन कम हो जाता है। गर्मी के दिनों में वैसे ही बिजली का संकट बना रहता है।
नतीजतन पूरे साल राज्य को बिजली संकट से जूझना पड़ता है। उत्तराखंड जल विद्युत निगम के निदेशक परियोजना पुरुषोत्तम कुमार का कहना है कि कोल और गैस आधारित परियोजनाओं को लेकर विचार चल रहा है, लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
आपदा में छोटी जल विद्युत परियोजनाएं बह गई हैं। नई बड़ी परियोजनाओं का विरोध हो रहा है। ऐसे में ऊर्जा संकट को दूर करने के लिए तत्काल 500 मेगावाट का गैस प्लांट प्रदेश में बनाना चाहिए। इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है, जिससे बिजली की समस्या से राहत मिल सकें। -- एके गर्ग, पूर्व मुख्य महाप्रबंधक उत्तराखंड जल विद्युत निगम