भीषण गर्मी में नदियों के गिरते जल स्तर ने राज्य में बिजली की किल्लत बढ़ा दी है। पर्याप्त पानी न मिलने से राज्य की विभिन्न जल विद्युत परियोजनाओं में उत्पादन तेजी से गिरा है।
हालात यहां तक है कि राज्य के बिजली घरों से मांग से करीब तीन गुना कम उत्पादन हो पा रहा है। अंतर पूरा करने के लिए उत्तराखंड पावर कारपोरेशन (ऊर्जा निगम) को दूसरे राज्यों और सेंट्रल ग्रिड से रोजाना लाखों रुपए की बिजली खरीदनी पड़ रही है।
इस बार पहाड़ों पर जमी बर्फ कम पिघलने से नदियों का जल स्तर घट गया है। ऐसे में राज्य के जल विद्युत गृह पर्याप्त उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं।
जून तक दुरुस्त होने की उम्मीद
उत्तराखंड जल विद्युत निगम के जल विद्युत गृह मनेरी भाली-द्वितीय में मरम्मत के चलते फिलहाल पूरी बिजली नहीं मिल पा रही है। ऊर्जा निगम प्रवक्ता मधुसूदन के मुताबिक, परियोजना दस जून तक दुरुस्त होने की उम्मीद है।
आज कल उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) राज्य के विद्युत गृहों से रोजाना औसतन 13 मिलियन यूनिट (एमयू) बिजली ऊर्जा निगम को दे रहा है।
प्रवक्ता के मुताबिक बृहस्पतिवार को राज्य जल विद्युत गृहों से 13.77 मिलियन यूनिट उत्पादन हुआ, जबकि शुक्रवार को मांग 37.69 एमयू रही। अंतर पूरा करने के लिए विभिन्न स्रोतों से खरीदारी के बाद कुल 37 एमयू बिजली जुटाई गई।
मई में खरीदी गई बिजली
स्रोत--------------------मात्रा (एमयू)
यूजेवीएनएल---------------344
विष्णुप्रयाग परियोजना-------15
केंद्रीय सेक्टर---------------382
सेंटर एक्सचेंज---------------77
टेंडर-------------------------148
राहत फिर भी नहीं
मैदानी क्षेत्रों में पड़ रही गर्मी ने बिजली खपत में तेजी से इजाफा किया है, जिससे मांग और बढ़ गई है। अतिरिक्त बिजली खरीद के बावजूद लोगों को भीषण गर्मी में लोकल फाल्ट और मरम्मत के नाम पर अघोषित कटौती से जूझना पड़ रहा है। आए दिन लोग बिजली के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं।