यही वजह है कि प्रदेश सरकार केंद्रीय पूल से अतिरिक्त बिजली के लिए पूरी ताकत लगा रही है। लेकिन केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय और राज्य के ऊर्जा विभाग के अधिकारियों में हुई बातचीत में मिले संकेत के अनुसार, राज्य को केंद्रीय पूल से पूरी 300 मेगावाट बिजली मिल पाएगी, इसमें शंका है।
गुजरात की मांग को देखते हुए दोनों राज्यों में अतिरिक्त बिजली का कोटा बंट सकता है। बहरहाल सरकार अतिरिक्त बिजली के लिए जोर लगा रही है। वर्तमान में प्रतिदिन 42 मिलियन यूनिट बिजली की मांग है। प्रदेश में 38 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है। इस अंतर को केंद्रीय पूल की बिजली से पूरा किया जा रहा है। लेकिन मई-जून महीने में बिजली की मांग 50 मिलियन यूनिट तक हो सकती है। इसे पूरा करने के लिए दो ही विकल्प हैं। या तो केंद्रीय पूल से बिजली मिले या खुले बाजार से महंगी बिजली खरीदी जाए।
गैस आधारित दो बिजली संयंत्र शुरू हो सकते हैं
रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस के दाम बढ़ने से देश के अधिकांश गैस आधारित बिजली संयंत्र बंद पड़े हैं। लेकिन बाजार में गैस के दाम में गिरावट आई है। इसे देखते हुए केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने राज्य सरकार को गैस आधारित संयंत्रों से बिजली की मांग पूरी करने का सुझाव दिया है। इसे देखते हुए राज्य में 214 मेगावाट का श्रावंती और 107 मेगावाट का गामा संयंत्र शुरू हो सकता है। यूपीसीएल के एमडी अनिल कुमार के मुताबिक, दोनों संयंत्रों को शुरू कराने की कोशिशें हो रही हैं।
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स्थायी समाधान के लिए कोयला आधारित संयंत्र लगाने पर भी विचार
बिजली संकट के स्थायी समाधान और भविष्य की जरूरत के लिए राज्य सरकार अब कोयला आधारित संयंत्र लगाने के विकल्प के बारे में भी विचार कर रही है। सचिव ऊर्जा आर मीनाक्षी सुंदरम के मुताबिक, कोयला आधारित बिजली संयंत्र उस राज्य में लगाने की सोच रहे हैं, जहां कोयला आसानी उपलब्ध हो। यूजेवीएनएल यह संयंत्र छत्तीसगढ़, उड़ीसा या झारखंड में लगा सकता है।