व्यवस्था बदलेगी तो नौकरी भी कर लेंगे, लेकिन पहली जरूरत देश की व्यवस्था बदलने की है।
देश में लोकसभा चुनाव की घोषणा हुई तो दिल नहीं माना और नौकरी छोड़कर आ गए दून। अब आम आदमी पार्टी (आप) के प्रत्याशी के लिए प्रचार कर रहा हूं।
अनूप नौटियाल के लिए प्रचार
मेरे जैसे न जाने कितने युवा देश भर में ऐसा कर रहे हैं। यह कहना है आईआईटी खड़कपुर से पासआउट गौरव उनियाल और रूस में वर्ल्ड बैंक में तैनात अमिरबन का। दोनों आप कार्यकर्ता के तौर पर दून में अनूप नौटियाल के लिए प्रचार कर रहे हैं।
शनिवार शाम को जब घंटाघर के पास आप कार्यकर्ता मानव श्रृंखला बनाकर जोर-जोर से नौटियाल के समर्थन में नारे लगा रहे थे तो उनमें कई ऐसे भी थे जो विदेश से नौकरी छोड़कर आए हैं।
कई ऐसे भी थे जिन्होंने आईआईटी और आईआईएम से पढ़ाई की है और अच्छी नौकरी कर रहे थे लेकिन व्यवस्था परिवर्तन के लिए आप का प्रचार करने में जुटे हैं। ये लोग बताते हैं कि वह अनूप नौटियाल को नहीं जानते।
लेकिन फेसबुक से लेकर घर-घर जाकर लोगों से उन्हें जिताने की अपील कर रहे हैं। आईआईटी खड़कपुर से पासआउट गौरव उनियाल बताते हैं कि मुंबई में एमएनसी में नौकरी करने के दौरान वह अक्सर देश की गरीबी के बारे में चिंतित रहते थे।
जॉब छोड़ दी और देहरादून चला आया
मन में बेचैनी रहने लगी। इसी दौरान देश में आम आदमी पार्टी की लहर चलने लगी। इससे कुछ उम्मीद बंधी तो सोचा कि इस संघर्ष में कूदना ही होगा। इसलिए जॉब छोड़ दी और देहरादून चला आया।
आईआईएम कलकत्ता से पासआउट और रूस में वर्ल्ड बैंक में अधिकारी अमिरबन भी व्यवस्था बदलने के लिए गौरव की तरह बेचैन थे।
मूलरूप से पश्चिम बंगाल के रहने वाले अमिरबन बताते हैं कि लाखों रुपये की नौकरी दोबारा लग सकती है, लेकिन देश की व्यवस्था बदलने का यही टाइम है। इसलिए मैं इस संघर्ष में कूद गया।
मानव श्रृंखला में युवा साथियों के साथ अनुष्का भी थी। अनुष्का लंदन कॉलेज ऑफ इकोनोमिक की छात्रा रही हैं। इस समय वह मुंबई में एक इंटरनेशनल संगठन से जुड़ी हैं।
कई और भी युवक आप प्रत्याशी के प्रचार में जुटे
वह कहती हैं कि दुनिया को बदलते हुए सभी देखना चाहते हैं, लेकिन उसे बदलेगा कौन? हमारी भी जिम्मेदारी सुनिश्चित हो। इसलिए सब कुछ छोड़कर दून आ गए। इन्हीं युवाओं की तरह कई और भी युवक आप प्रत्याशी के प्रचार में जुटे हैं।
यह लोग कहते हैं कि उन्हें जो भी जिम्मेदारी दी जाती है उसे निभाने में कोई संकोच नहीं करते हैं। यह लोग सोशल साइट से लेकर लोगों के घर-घर जाकर आप प्रत्याशी का प्रचार कर रहे हैं। यह लोग युवाओं से कहते हैं कि टेक्नोक्रेट न बनें, इंटलेक्चुअल बनें।