उत्तराखंड के चुनावी इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब निर्वाचन आयोग को अपने ही आंकड़ों को गलत साबित करना पड़ा।
मतदान के दिन आयोग ने 68 प्रतिशत मतदान होने और इसके 70 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना जताई थी। मगर जैसे-जैसे चुनाव क्षेत्रों के आंकड़ों की सच्चाई खुलती गई, वोट प्रतिशत गिरता गया। पांच दिन की माथापच्ची के बाद आयोग ने मंगलवार को जो मतदान का आंकड़ा जारी किया है, उसमें साढ़े पांच प्रतिशत की कमी आई है।
आयोग के हिसाब से 69 विधानसभा सीटों पर 65.64 फीसदी मतदान हुआ। करीब 7420710 मतदाताओं में से 4870679 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। आंकड़ों की सही तस्वीर सामने आई तो ये खुलासा हुआ कि सबसे ज्यादा मतदान सितारगंज या गदरपुर सीट पर नहीं बल्कि लक्सर में (81.87 फीसदी) हुआ। अलबत्ता 45.74 फीसदी मतदान के साथ सल्ट विस में सबसे कम मतदाता मतदान करने पहुंचे।
मगर आयोग के अपने तर्क
भारतीय निर्वाचन आयोग
नए आंकड़ों से निर्वाचन आयोग असहज है। मगर आंकड़ों को लेकर इसके अपने तर्क हैं। मसलन उसका कहना है पिछले चुनाव की तुलना में 650954 मतदाताओं की बढ़ोत्तरी हुई है। 10 वर्ष में कुल 13 लाख 27 हजार 899 मतदाता बढ़े।
सर्वाधिक मतदान वाली सीटें
लक्सर-81.87 प्रतिशत, हरिद्वार ग्रामीण 81.69 प्रतिशत, सितारगंज 81.21 प्रतिशत, पिरानकलियर 81.43 प्रतिशत, गदरपुर 80.71 प्रतिशत।
सबसे कम मतदान वाली सीटें
सल्ट 45.74 प्रतिशत, चौबट्टाखाल 45.74 प्रतिशत, लैंसडौन 47.95, घनसाली 48.79 प्रतिशत।
मतदान से जुड़े महत्वपूर्ण
मतदान के लिए लगी लंबी लाइन
- फोटो : file photo
सबसे अधिक और सबसे कम मतदान का ट्रैंड
2002-2007-2012-2017
सबसे अधिक-73.19 (लक्सर)-78.47(बाजपुर)-82.55 गदरपुर)-81.87(लक्सर)
सबसे कम-42.26(श्रीनगर)-52.68 (भिकियासैंण)-51.91(चौबट्टाखाल)-45.74 (सल्ट)
- 2017 में पिछले चुनाव की तुलना 52 विधानसभाओं में मतदान गिरा।
विस की 69 में से 23 सीटों पर 70 फीसदी या इससे ऊपर मतदान हुआ।
-2012 में 20 सीटों पर 70 फीसदी से अधिक मतदान हुआ था।
2012 में 12 विधानसभा सीटों पर 60 फीसदी से भी कम मतदान हुआ था।
-2007 में 10 विधानसभा क्षेत्रों में 70 फीसदी से ऊपर मतदान हुआ था।
25 विधानसभा क्षेत्रों में 60 फीसदी से कम मतदान हुआ था।
-2002 में 14 विधानसभा सीटों पर 60 फीसदी से अधिक मतदान हुआ था।
21 विधानसभा सीटों पर 50 फीसदी से कम मतदान हुआ था।