फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सोशल साइट के यह 'हीरो' युवाओं को रिझाने में जीरो

Mon, 21 Apr 2014 01:04 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
फेसबुक, वाट्स एप, ट्विटर जैसी सोशल साइट्स लोकसभा चुनाव में नेताओं के लिए मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाने का जरिया भले बन गई हैं।
विज्ञापन


लेकिन मतदान में जिस युवा वर्ग की सबसे अधिक संख्या रहने वाली है, उस पर इन साइट्स पर किए जाने वाले चुनावी अपडेट्स का कोई असर नहीं।

हीरो नजर आने वाले नेता, पार्टियां जमीन पर जीरो

साइट्स पर लाइक और फॉलोइंग के लिहाज से हीरो नजर आने वाले नेता, पार्टियां जमीन पर जीरो हैं। कम से कम दून के कॉलेज गोइंग यूथ का नजरिया तो यही है।

वे मानते हैं कि सिर्फ साइट्स पर पेज अपडेट करना ही नेताओं के लिए काफी नहीं। उन्हें ठोस स्थायी नीतियों से युवाओं को रूबरू कराना होगा।

ऐसे में यहां चुनावी समर में उतरे योद्धाओं को युवाओं के बीच पैठ बनाने के लिए वर्चुअल वर्ल्ड से बाहर आकर जमीनी गतिविधियों पर जोर देना जरूरी लगता है।

वाट्स एप और फेसबुक मनोरंजन का जरिया

डीएवी कॉलेज के छात्र अभिषेक सिंह कहते हैं कि वाट्स एप और फेसबुक उनके लिए मनोरंजन का जरिया है।

यहां वे वीडियो, फोटो अपलोड कर दोस्तों से मिल सकते हैं, बात कर सकते हैं। लेकिन चुनाव में इसके उपयोग को वे कारगर नहीं मानते।

अभिषेक कहते हैं कि इस शेयरिंग से कुछ होने वाला नहीं। जब तक नेता स्थायी समाधान न दें, उन्हें वोट देने का मन बनाने का कोई मतलब नहीं।

डीएवी के ही छात्र मुकेश रावत का कहना है कि किसी भी सरकार को युवाओं के लिए शिक्षा की मजबूत नीति और रोजगार के स्थायी उपचार करने चाहिए। तभी युवा भी वोट देने आगे आएंगे।
विज्ञापन

जनता में विश्वास जगाना बड़ी चुनौती

डीबीएस कॉलेज के छात्र अनिमेष का कहना है कि सोशल साइटों पर दी जा रही जानकारी कितनी सच हैं, यह बड़ा सवाल है।
लेकिन अहम सवाल यह है कि जो भी पार्टी सरकार बनाने वाली है, वह युवाओं के बीच वोट देने का कोई पुख्ता आधार तो पेश करे।

अनिमेष के मुताबिक यह आधार उन्हें न तो भाजपा में नजर आता है और न ही कांग्रेस में।

बात खत्म करते हुए अनिमेष ने यह सवाल भी किया कि नेता जिन लोगों के बीच सोशल साइट्स पर प्रचार कर रहे हैं, क्या वाकई वे युवा मतदाता हैं।

साफ है कि युवाओं के भरोसे चुनावी नैया पार लगाने के सपने बुन रहे नेताओं को इस चुनाव में युवा वोटरों को बूथ तक पहुंचाना और उनमें अपने, अपनी नीतियों के प्रति विश्वास जगाना बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें