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Dehradun News: राज्य में माइनिंग कारपोरेशन बनाने की कवायद

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- कई राज्यों में लागू है व्यवस्था
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अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। राज्य में मध्य प्रदेश, राजस्थान की तरह माइनिंग कारपोरेशन बनाने की कवायद चल रही है। माइनिंग कारपोरेशन के माध्यम से ही रेता, बजरी के अलावा खड़िया खनन कराने का विचार है। इस संबंध में प्रारंभिक बातचीत भी हुई है।
अभी राज्य में अलग-अलग एजेंसी खनन का काम करती हैं। इसमें आरक्षित वन क्षेत्र में खनन का काम वन निगम के पास है। राजस्व क्षेत्रों में खनन की जिम्मेदारी कुमाऊं मंडल और गढ़वाल मंडल विकास निगम के पास है। निजी पट्टों के माध्यम से भी खनिज निकासी की जाती है। शासन स्तर पर खनन के काम के लिए एक माइनिंग कारपोरेशन बनाने पर मंथन चल रहा है। इसमें वर्तमान काम के अलावा जो नया खनन का काम हो, वह माइनिंग कारपोरेशन के माध्यम से कराया जाए।
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इंसेट
माइनिंग कारपोरेशन में विशेषज्ञ होंगे
भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के सचिव बीके संत ने बताया कि कई राज्यों में माइनिंग कारपोरेशन की व्यवस्था है। अभी इस संभावना के बारे में प्रारंभिक बातचीत ही हुई है। भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के निदेशक राजपाल लेघा ने बताया कि जो संस्थाएं काम कर रही है, वह करती रहेंगी। कोई नया काम होगा, वह कारपोरेशन के माध्यम से सकेगा होगा। इसमें रेता-बजरी, खड़िया, मैग्नेसाइट समेत अन्य सभी खनन का काम शामिल होगा। कारपोरेशन के पास जियोलाजिस्ट, सर्वेयर समेत तकनीकी जानकार होंगे, जिससे अनुमति लेने समेत अन्य कामों में समस्या आती है और समय लगता है। उसमें सुविधा रहेगी। अभी इस बारे में बातचीत हुई है। जिन राज्यों में व्यवस्था लागू है, उसका भी अध्ययन किया जाएगा।
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