सोमवार की रात से गुरु वक्री हो गए हैं। जो कि अब आठ अप्रैल (2015)को मार्गी होंगे। वैसे तो किसी भी ग्रह की वक्री (उल्टी) चाल अच्छी नहीं मानी जाती है लेकिन गुरु के वक्री को अच्छी दृष्टि से देखा जा रहा है। कुछ राशियों को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर को बृहस्पति की यह चाल फायदा देने वाली है।
गुरु बारह साल तक बारह राशियों पर घूमते हैं यानी एक साल एक राशि पर रहते हैं। 19 जून को गुरु कर्क राशि पर आए थे इसके बाद आठ दिसंबर की रात 1 बजकर 40 मिनट से गुरु वक्री हो गए हैं। कर्क राशि पर मंगल की भी सप्तम दृष्टि हैं।
जो कि शुभ मानी जा रही है। उत्तराखंड विद्वत सभा के उपाध्यक्ष आचार्य भरत राम तिवारी ने बताया कि गुरु का वक्री रहना अच्छा रहेगा। इससे पृथ्वी पर अन्न-धन की कमी नहीं होती। राजाओं को सुख मिलता है। डॉ. आचार्य सुशांत राज ने बताया कि यह बदलाव कर्क राशि वालों के लिए उलझने बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
किस राशि पर क्या प्रभाव
वृश्चिक, तुला, मकर, कुंभ, कर्क राशि के जातकों के लिए थोड़ा परेशानी भरा रह सकता है।
वृष, मेष, सिंह, कन्या, तुला, धनु, मिथुन राशि के जातकों के लिए मिला-जुला असर रहेगा।