आरएसएस के सर संघ चालक मोहन भागवत ने कहा कि वर्तमान शिक्षा पद्धति से दुनिया में कोई देश संतुष्ट नहीं है। पेट भरने की शिक्षा से पूरी दुनिया अब ऊब चुकी है। अब सच्चा मनुष्य बनाने वाली शिक्षा की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विदेशी भाषा और संस्थाओं से सहयोग लेने में कोई बुराई नहीं है।
शनिवार को पतंजलि योगपीठ फेज-2 में आयोजित आरएसएस के नवसृजन शिविर में शिक्षकों से संवाद में भागवत ने कहा कि मौजूदा शिक्षा मानवीय संवेदनाओं को पीछे छोड़ रही है।
आज ऐसी शिक्षा पद्धति की जरूत है, जिसमें अच्छा और सच्चा मनुष्य बनाने की प्रेरणा व राष्ट्र का जिम्मेदार नागरिक होने का अहसास हो। इसके साथ ही शिक्षा को सुलभ और सस्ती बनाया जाना चाहिए।
नई पीढ़ी को शिक्षा दान और दया के रूप में नहीं बल्कि अधिकार के तौर पर देनी होगी। भागवत ने कहा कि सरकार शिक्षा में सुधार करें या न करे, संघ स्वयंसेवक इसके लिए कार्य कर सकते हैं।