प्रदेश के पूर्ण साक्षर होने का सपना अभी दूर है। इस समय केवल छह जिलों में ही साक्षरता अभियान चलाया जा रहा है। बाकी सात जिलों में भी असाक्षरों की तादात काफी ज्यादा है, लेकिन ये अभी तक इस अभियान से दूर हैं। छह जिलों में भी केंद्र सरकार की योजना के तहत अभियान चलाया जा रहा है।
प्रदेश में साक्षरता अभियान वर्ष 2009-10 में शुरू किया गया था। यह सिर्फ हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर, बागेश्वर, चंपावत, उत्तरकाशी, टिहरी जिले में ही चलाया जा रहा है। इनमें पांच लाख 11 हजार 277 लोगों को साक्षर किया जाना था। यह लक्ष्य 31 मार्च 2017 तक पूरा होना है, लेकिन 31 मार्च 2016 तक आधे से भी कम चार लाख 22 हजार लोगों को ही साक्षर किया गया है।
नियमानुसार किसी व्यक्ति को नवसाक्षर तब घोषित किया जाता है जब वह राष्ट्रीय साक्षरता मिशन की ओर से निर्धारित परीक्षा में उत्तीर्ण हो जाता है। यह परीक्षा साल में दो बार मार्च और अगस्त में आयोजित होती है। पिछली 21 अगस्त को भी परीक्षा आयोजित हुई थी। इसमें करीब 60 हजार लोगों ने हिस्सा लिया था।
अभी इन लोगों का परिणाम घोषित नहीं किया गया है। दूसरी ओर प्रदेश के बाकी सात जिले अभी तक साक्षरता अभियान से अछूते हैं। ऐसा नहीं है कि इन जिलों में साक्षरता का प्रतिशत बेहतर हो। वर्ष 2011 से अब तक के नवीनतम साक्षरता आंकड़ों के मुताबिक उत्तराखंड का कोई भी जिला ऐसा नहीं है जिसमें 85 फीसदी भी साक्षरता प्रतिशत हो।
इन आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश का कुल साक्षरता प्रतिशत 78.8 है। इस संबंध में विभागीय अधिकारियों का कहना है कि 2001 की जनगणना के अनुसार बनी केंद्र सरकार की ओर से बनी योजना के अनुुसार उन जिलों में साक्षरता अभियान चलाया जाना था जिन जिलों में महिलाओं की साक्षरता दर 50 फीसदी से कम है। इस हिसाब से प्रदेश के छह जिले चयनित किए गए थे।
साक्षरता अभियान अभी छह जिलों में ही चलाया जा रहा है। निर्देश मिलने पर बाकी के सात जिलों में अभियान चलाकर लोगों को साक्षर किया जाएगा।
- पदमेंद्र सकलानी, राज्य परियोजना प्रबंधक, राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण