कैंसर पीड़ित सहायक अध्यापिका मनीषा को राजकीय हाईस्कूल कबेला चकराता (उत्तराखंड) के लिए हर रोज करीब 50 मीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़नी होती है।
कैंसर पीड़ित उर्मिला और उनकी तरह ही कई अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं भी गंभीर बीमार हैं, लेकिन शिक्षा विभाग उनके प्रति संवेदनहीन बना हुआ है जबकि सिफारिशी लोगों के तबादले किये जा रहे हैं।
उत्तरकाशी के दुर्गम विद्यालय में तैनात कैंसर पीड़ित शिक्षक जोगेंद्र सिंह की मौत के बावजूद शिक्षा विभाग की गंभीर बीमार शिक्षकों के प्रति नींद नहीं टूट रही है। एक दो नहीं बल्कि 200 से अधिक शिक्षक गंभीर बीमारी और कैंसर से पीड़ित हैं। कुछ शिक्षक पिछले दो साल से तबादले के लिए भटक रहे हैं।
चकराता ब्लॉक के हाईस्कूल कबेला में सहायक अध्यापिका मनीषा जैन के मुताबिक वर्ष 2013 से वह कैंसर पीड़ित हैं। दिल्ली अपोलो में इलाज चल रहा है। सुगम विद्यालय में तबादले के लिए निदेशालय के कई चक्कर लगा चुकी हैं। 29(1) के तहत भी आवेदन किया, लेकिन अति दुर्गम से सुगम विद्यालय में तबादला नहीं हो पाया।
चमोली जिले के जूनियर हाईस्कूल में सहायक अध्यापिका उर्मिला डिमरी किमोथैरेपी से पैर खराब होने के बाद बैसाखी के सहारे चल रही हैं। उर्मिला पिछले दो साल से तबादले के लिए भटक रही हैं।
वह बताती हैं कि उनके पति प्रकाश डिमरी दून के एक विद्यालय में रसायन विज्ञान के प्रवक्ता पद पर कार्यरत हैं। उनके कैंसर पीड़ित होने और पति के दून में नौकरी करने के बावजूद उनका तबादला जिले में नहीं किया गया। वह बताती हैं कि अधिकारी कहते हैं जूनियर हाईस्कूलों के शिक्षकों के अंतरजनपदीय तबादलों के लिए जीओ नहीं है।
माध्यमिक शिक्षा में ही करीब 100 शिक्षक गंभीर बीमार और कैंसर पीड़ित हैं, इतने शिक्षकों के तबादलों के लिए नियमावली में संशोधन की आवश्यकता है, इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।
- राकेश कुंवर, शिक्षा निदेशक माध्यमिक शिक्षा