वन्य जीव तस्करों के गुर्गे तो बाघ, गुलदार की खालों के साथ पकड़े जा रहे हैं, लेकिन उनके आका गिरफ्त में नहीं आ रहे। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने वन्य जीव तस्करों के आकाओं और तस्करी में लगे पुराने अपराधियों की छानबीन शुरू कर दी है। खासतौर पर उन तस्करों को खोजा जा रहा है जिन्होंने बड़ी संपत्ति बनाई है। इसके लिए ईडी ने पुलिस की चार्जशीट से हटकर छानबीन शुरू कर दी है।
ईडी का कहना है कि पुलिस तस्करों के गुर्गों को पकड़कर खालें बरामद कर लेती है। इन गुर्गों को जेल भेज दिया जाता है, लेकिन इनके आकाओं तक प्रोसीडिंग नहीं पहुंच पाती है। वन्य तस्करों के जो गुर्गे अभी तक पकड़े गए हैं, उनकी माली हालत अच्छी नहीं थी।
इन लोगों का वन्य जीव तस्कर ‘कैरियर’ के रूप में इस्तेमाल करते हैं। पुलिस की चार्जशीट लगने के बाद वन्य जीव तस्करी के मामले ठंडे बस्ते में चले जाते हैं। ईडी ने अब सफेदपोशों की छानबीन शुरू कर दी है। ऐसे लोगों की संपत्ति के बारे में छानबीन की जा रही है, जो वन्य जीव तस्करी में संदिग्ध हैं।
सारे अभिलेख जुटाने के बाद ईडी कार्रवाई शुरू कर देगा। ईडी को नेशनल वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो ने वन्य तस्करों के खिलाफ गठित विभिन्न विभागों की संयुक्त टीम में शामिल किया है।