- चारधाम यात्रा में बढ़ेगी यात्रियों की संख्या, मंडियों तक कृषि उत्पाद पहुंचाना होगा आसान
- उत्तराखंड और देश की राजधानी के बीच का सफर में महज ढाई घंटे में होगा पूरा
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। करीब 11,963 करोड़ की लागत से तैयार 213 किमी लंबे छह लेन दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से उत्तराखंड में पर्यटन, निवेश व रोजगार को रफ्तार मिलेगी। इस आर्थिक गलियारा से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून व देश की राजधानी दिल्ली के बीच का सफर महज ढाई घंटे में पूरा होगा।
पर्यटन व तीर्थाटन उत्तराखंड के अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। चारधाम यात्रा, कॉर्बेट व राजाजी नेशनल पार्क, मसूरी, टिहरी, औली समेत उत्तराखंड के विभिन्न पर्यटक स्थलों पर देश दुनिया से पर्यटन व तीर्थयात्री आते हैं। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के शुरू होने से उत्तराखंड में आने वाले सैलानियों की तादात बढ़ने की उम्मीद है। पर्यटन को बढ़ावा मिलने से रोजगार के अवसर सृजित होंगे। पर्यटन क्षेत्र में 49 प्रतिशत पूंजी निवेश रोजगार के लिए किया जाता है। इसके अलावा दिल्ली से देहरादून के बीच छह घंटे का सफर कम होकर ढाई घंटे में होने निवेशक उत्तराखंड में निवेश के लिए आकर्षित होंगे। यह आर्थिक गलियारा राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के लिए ग्रीन कॉरिडोर साबित होगा।
उत्तराखंड के कृषि व बागवानी उत्पादों को राष्ट्रीय मंडियों में आसानी से पहुंचाया जाएगा। उत्तरकाशी के हर्षिल, मोरी, चकराता, त्यूनी का सेब, जोशीमठ और चकराता की राजमा, पुरोला के लाल चावल, तथा रुद्रप्रयाग के बुरांश का जूस, मंडुवा, झंगोरा समेत पारंपरिक उत्पादों को पहले की तुलना में कम लागत पर बड़े शहरों तक पहुंचा सकेंगे। लॉजिस्टिक लागत में कमी आने से किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिलेगा। इसके अलावा राज्य में कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउसिंग, खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा। इस परियोजना से परिवहन क्षेत्र, कृषि आधारित उद्योग, छोटे और मध्यम उद्योगों को गति मिलने से रोजगार के अवसर मिलेंगे।