बाकी जिलों में प्रशिक्षण जारी है और इनका प्रशिक्षण पूरा होने पर इनकी संख्या बढ़ जाएगी। मनोज पंत के मुताबिक इस गणना के तहत दुकान एवं अन्य उद्यमों का सर्वे तो होगा ही, इसके साथ ही घर में अगर कोई आर्थिक गतिविधि होगी तो उसको भी जियो टैग किया जाएगा।
गणना की शुरुआत सीएम ने अपने कार्यालय से की तो सबसे पहले सीएम का कार्यालय ही जियो टैग हुआ। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के उप महानिदेशक राजेश कुमार के मुताबिक सीएम की ओर से वीडियो कांफ्रेंस कर जिलाधिकारियों को गणना को समय से पूरा करने का निर्देश दिया गया। सचिव नियोजन अमित नेगी ने भी जिलाधिकारियों से गणना के संदर्भ में बात की।
1. राज्य में पहली बार 2005 में आर्थिक गणना हुई थी। इसके बाद 2013 में आर्थिक गणना हुई। इन आठ सालों में प्रदेश में 75058 उद्यमों की संख्या बढ़ी। रोजगार में करीब 56.14 प्रतिशत का इजाफा हुआ। 2013 में हुई आर्थिक गणना में प्रदेश में महिला उद्यमियों की संख्या 31419 पाई गई। सभी उद्यमों से 10.50 लाख लोग जुड़े हुए पाए गए।
2. इस बाद का आर्थिक सर्वे में सूचना प्रौद्योगिकी का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। गणना के परिणाम तीन माह के अंदर सामने आ जाएंगे। गणना में जियो टैगिंग होगी। मतलब प्रगणक या सर्वे करने वाले स्मार्ट फोन से गणना में शामिल इकाई को जियो टैग करेंगे।
प्रगणक को दें जानकारी...
इस बार की गणना में प्रगणक को जानकारी देने से इंकार करने या गलत जानकारी देने पर जुर्माना भी लग सकता है। इसके लिए सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ने बाकायदा इसका निर्देश जारी किया है। गणना में हासिल की गई जानकारी को गोपनीय रखा जाएगा।
क्या है गणना का फायदा...
गणना से यह पता लगेगा कि किस क्षेत्र में कितने तरह के उद्यमों से लोग जुड़े हुए हैं और ये किस तरह का रोजगार कर रहे हैं। इस बार की गणना में बिजनेस रजिस्टर भी तैयार होगा और किसी भी उद्यम का अपना खास पहचान नंबर होगा। यह सरकार और अन्य नीति नियंताओं के लिए क्षेत्र के आधार पर सही योजनाएं बनाने के काम आएगा।
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